चालू वित्त वर्ष में चावल का निर्यात 200-220 लाख टन के बीच पहुंचने की उम्मीद
28-Apr-2025 07:46 PM
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने सभी किस्मों एवं श्रेणियों के चावल के निर्यात को सभी नियंत्रणों एवं प्रतिबंधों तथा सीमा शुल्क से पूरी तरह मुक्त कर दिया है जिससे भारत को इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न का शिपमेंट बढ़ाने का शानदार अवसर मिल रहा है।
नियंत्रणों- प्रतिबंधों को पिछले वित्त वर्ष में काफी देरी से हटाया गया फिर भी चावल का निर्यात 198 लाख टन पर पहुंच गया। इसके मुकाबले 2025-26 के वर्तमान वित्त वर्ष में आरंभ से ही स्थिति अनुकूल है इसलिए कुल वार्षिक निर्यात बढ़कर 200-220 लाख टन के बीच पहुंच जाने की पक्की उम्मीद है।
एक एग्री कॉमोडिटी एक्सपर्ट तथा चावल के बड़े निर्यातक राजेश पहाड़िया के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय बाजार में चावल की जरूरत से ज्यादा आपूर्ति होने के कारण पिछले कुछ समय से इसकी मांग कमजोर चल रही थी लेकिन अब हालात बदल रहे हैं।
पाकिस्तान में चावल का निर्यात योग्य स्टॉक लगभग समाप्त हो चुका है और वियतनाम में भी नया माल आने में अभी देर है। थाईलैंड के चावल का भाव ऊंचा है।
इसे देखते हुए मई से जुलाई तक भारतीय चावल के निर्यात में शानदार इजाफा होने के आसार हैं। कोरोना के समय में भारत ने रिकॉर्ड मात्रा में चावल का निर्यात किया था और अब उसी प्रदर्शन को दोहराने का समय आ गया है।
वैश्विक बाजार में भारतीय चावल प्रतिस्पर्धी मूल्य स्तर पर उपलब्ध है लेकिन आयातक देशों की जोरदार मांग निकलने पर चावल के दाम में कुछ तेजी आ सकती है।
सरकार के पास न्यूनतम आवश्यक बफर स्टॉक के मुकाबले करीब तीन गुणा (296 प्रतिशत) अधिक चावल का भंडार मौजूद है जबकि घरेलू प्रभाग में भी इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति काफी हद तक सुगम बनी हुई है।
सरकारी चावल की क्वालिटी बहुत अच्छी नहीं है। एथनॉल निर्माताओं को 2250 रुपए प्रति क्विंटल के रियायती मूल्य पर 24 लाख टन चावल का कोटा दिया गया है।
एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि आयातक देशों को अत्यन्त सस्ते दाम पर भरपूर मात्रा में चावल प्राप्त होने से अपनी अच्छी क्वालिटी के चावल का निर्यात करने का अवसर मिल रहा है।
बांग्ला देश सरकार ने विशिष्ट क्वालिटी के 18,450 टन चावल का निर्यात कोटा जारी किया है। यह चावल सेमी- बासमती किस्म का माना जाता है।
घरेलू प्रभाग में सरकार द्वारा भारी मात्रा में खरीद किए जाने के बावजूद धान का भाव घटकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के आसपास या उससे कुछ नीचे आ गया है। रबी कालीन धान की आवक शुरू हो गई है।
