चीनी की मासिक स्टॉक धारिता का उल्लंघन करने पर मिलों का बिक्री कोटा घटेगा
28-Mar-2025 04:00 PM
नई दिल्ली। केन्द्रीय खाद्य, उपभोक्ता मामले एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अधीनस्थ निकाय- चीनी एवं वनस्पति तेल निदेशालय ने देश भर की सभी चीनी मिलों के मुख्य अधिकारियों / प्रबंध निदेशकों को पत्र भेजकर चीनी की मासिक स्टॉक धारिता सीमा आदेश के अनुपालन के लिए दिशा-निर्देशों की जानकारी देते हुए कहा है कि यदि इस स्टॉक धारिता सीमा का उल्लंघन किया गया तो उस पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
पत्र में कहा गया है कि यदि किसी चीनी मिल या मिल समूह द्वारा किसी एक माह के लिए नियत फ्री सेल कोटा से अधिक मात्रा में चीनी की बिक्री की जाती है तो अगले महीने के कोटे में उतनी अतिरिक्त मात्रा की कटौती कर दी जाएगी।
यदि बार-बार यह गलती दोहराई जाएगी तो चीनी के अगले फ्री सेल कोटे में अलग-अलग मात्रा में कटौती होगी। इसके तहत पहली बार नियम का उल्लंघन करने पर अतिरिक्त बिक्री मात्रा के 100 प्रतिशत की कटौती होगी
जबकि दूसरी बार की गलती पर 115 प्रतिशत, तीसरी बार के उल्लंघन पर 130 प्रतिशत तथा चौथी बार या उससे आगे के उल्लंघन पर 150 प्रतिशत की कटौती की जाएगी।
इसे इस तरह समझा जाना चाहिए कि यदि किसी मिल को अप्रैल 2025 के लिए 100 टन चीनी की घरेलू बिक्री कोटा प्राप्त होगा और वह 110 टन चीनी बेचती है तो मई के कोटे में से 10 टन की कटौती हो जाएगी। इसी तरह आगे का क्रम चलता रहेगा।
एक अन्य दिशा निर्देश के तहत यदि कोई मिल किसी एक माह के लिए अपने आवंटित कोटा के 90 प्रतिशत भाग से कम चीनी की बिक्री करती है
और उस महीने की 20 तारीख तक सरकार को इसकी सूचना नहीं देती है तो उसे अगले महीने में चीनी का उतना ही कोटा दिया जाएगा जितना उसने पिछले महीने उपयोग किया।
दिशा निर्देश में यह भी कहा गया है कि घरेलू प्रभाग में बिक्री के लिए चीनी का जो मासिक कोटा आवंटित होगा उसे किसी भी हाल में अन्य उद्देश्य के लिए नहीं बेचा जाएगा।
यदि कोई चीनी मिल अपने मासिक जीएसटी आर 1 की सारणी 12 में उल्लिखित सही-सही एचएसएन कोड के अनुरूप ब्यौरा उपलब्ध नहीं करवाती है तो उसे चीनी की घरेलू बिक्री का कोटा आवंटित नहीं किया जाएगा।
यदि कोई चीनी मिल एक शुगर सीजन में दो बार से अधिक स्टॉक होल्डिंग लिमिट के आदेश का उल्लंघन करती है तो उसे चीनी की कोई अतिरिक्त मात्रा (कोटा) जारी करने पर विचार नहीं किया जाएगा
भले ही सम्बन्धित गन्ना आयुक्त ने इसकी सिफारिश की है। ऐसी चीनी मिल को डी एफ पी डी तथा डी एस वी ओ स्कीम (निर्यात कोटा सहित) के तहत मिलने वाले लाभ से वंचित कर दिया जाएगा।
