पश्चिम एशिया संकट से खाद्य तेल उद्योग भी प्रभावित
21-Apr-2026 03:51 PM
मुम्बई। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) के अध्यक्ष ने कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट एवं अनिश्चित स्थिति के अन्य क्षेत्रों के साथ खाद्य तेल उद्योग भी प्रभावित हो रहा है। हालांकि अस्थायी युद्ध विराम एवं थोड़े समय के लिए होर्मुज स्ट्रेट खुलने से कुछ उम्मीद जगी थी लेकिन अब वह समाप्त होती जा रही है।
भारतीय खाद्य तेल उद्योग के समक्ष दोहरी चुनौती पैदा हो गई है। शिपिंग मार्ग खतरनाक बना हुआ है, जहाजों का किराया- भाड़ा काफी बढ़ गया है और खाद्य तेलों एवं ऑयल मील का व्यापारिक प्रवाह अनिश्चित हो गया है।
इससे उद्योग को अपनी रणनीति बनाने में काफी असुविधा हो रही है। इसके अलावा जब से ईरान-अमरीका के बीच युद्ध आरंभ हुआ तब से तेल-गैस का संकट भी बढ़ने लगा।
इतना ही नहीं बल्कि क्रूड खनिज तेल से निर्मित होने वाले अवयवों- पोली एथिलीन तथा पोली प्रोपीलीन का दाम 50-60 प्रतिशत तक बढ़ गया है जबकि प्लास्टिक पैकेजिंग के लिए ये दोनों महत्वपूर्ण इनपुट माने जाते हैं।
इसके फलस्वरुप बोतल एवं प्लास्टिक रैपर्स का मूल्य बढ़ गया है। आमतौर पर उत्पाद के कुल लागत खर्च में पैकेजिंग मैटीरियल की भागीदारी 15 से 25 प्रतिशत तक रहती है।
इसका मतलब यह हुआ कि पैकेजिंग मैटीरियल में सामान वृद्धि होने पर भी उत्पाद का लागत खर्च बढ़ जाता है। खाद्य तेल उद्योग को भी इस समस्या का सामान करना पड़ रहा है और मिलर्स / प्रोसेसर्स को अपने उत्पाद का दाम बढ़ाने का लिए विवश होना पड़ रहा है।
जब तक पश्चिम एशिया में स्थिति सामान्य नहीं होती है तब तक खाद्य तेल उद्योग के समक्ष अनेक चुनौतियां बरकरार रह सकती हैं। खाद्य तेलों का आयात एवं ऑयल मील का निर्यात प्रभावित हो सकता है।
