चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में बढ़ोत्तरी की जरूरत पर जोर
15-Jun-2026 07:31 PM
मुम्बई। एक अग्रणी उद्योग विश्लेषक तथा एक महत्वपूर्ण चीनी कम्पनी के कार्यकारी निदेशक का कहना है कि यदि चीनी के एक्सफैक्टरी न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में समुचित बढ़ोत्तरी हो जाए तो इससे ग्रीन एथनॉल प्रोग्राम को काफी बढ़ावा मिल सकता है। चीनी कंपनियों की आमदनी में वृद्धि होने पर उसे हरित ऊर्जा के क्षेत्र में पूंजी निवेश बढ़ाने का प्रोत्साहन मिलेगा। पिछले सप्ताह मुम्बई में आयोजित 'शुगर-एथनॉल एंड बायो-एनर्जी इंडिया कांफ्रेंस' को सम्बोधित करते हुए विश्लेषक ने कहा कि भारत के लिए एथनॉल का उत्पादन बढ़ाना बहुत आवश्यक है।
अंतिम बार चीनी के एमएसपी में फरवरी 2019 में बढ़ोत्तरी की गई थी जब इसे 2900 रुपए प्रति क्विंटल से 200 रुपए बढ़ाकर 3100 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया था। उसके बाद से उद्योग लगातार इसमें वृद्धि करने की मांग कर रहा है मगर सरकार उसे स्वीकार नहीं कर रही है।
दूसरी ओर गन्ना के उचित एवं लाभकारी (एफआरपी) में प्रत्येक साल इजाफा होने से चीनी का लागत खर्च बहुत बढ़ गया है। उद्योग द्वारा सरकार से चीनी का एक्सफैक्टरी एमएसपी बढ़ाकर कम से कम 3800 रुपए प्रति क्विंटल नियत करने का आग्रह किया जा रहा है।
गन्ना का उचित एवं लाभकारी मूल्य 2019-20 के सीजन में 275 रुपए प्रति क्विंटल नियत किया गया था जो 2026-27 के सीजन तक आते-आते बढ़कर 365 रुपए प्रति क्विंटल (100 किलो) पर पहुंच गया।
विश्लेषक के अनुसार देश में चीनी का जो अधिशेष स्टॉक बचता है उसे सहेजकर रखने के बजाए विदेशों में निर्यात किया जाना चाहिए। निर्यात करने के तौर-तरीकों के बारे में गम्भीरतापूर्वक सोच-विचार किए जाने की जरूरत है और एथनॉल सहित हरित ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाकर उस उच्च मुकाम तक पहुंचाया जाना चाहिए जहां से इसका निर्यात करना संभव हो सके। यह भविष्य के लिए जरुरी है।
