चीनी के उत्पादन में भारी गिरावट के बावजूद उपलब्धता का संकट नहीं

09-May-2025 05:28 PM

नई दिल्ली। गन्ना की क्रशिंग एवं चीनी के उत्पादन का मौजूदा सीजन लगभग समाप्त हो चुका है और नया मार्केटिंग सीजन अक्टूबर 2025 में औपचारिक तौर पर आरंभ होगा।

इस अवधि में घरेलू मांग एवं जरूरत को पूरी करने के लिए उद्योग के पास चीनी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहेगा लेकिन वर्तमान मार्केटिंग सीजन के अंत में यानी 30 सितम्बर 2025 को उद्योग के पास चीनी का स्टॉक घटकर 50 लाख टन से नीचे आ सकता है।

आमतौर पर उद्योग के पास अगले मार्केटिंग सीजन के शुरूआती ढाई माह की घरेलू जरूरत को पूरा करने लायक चीनी का स्टॉक उपलब्ध रहना चाहिए जो 22 लाख टन की औसत मासिक खपत के आधार पर 55 लाख टन बैठता है। 

उद्योग समीक्षकों के अनुसार इस आंकड़े के आधार पर कहा जा सकता है कि चीनी की मांग एवं आपूर्ति का समीकरण कुछ हद तक जटिल रह सकता है।

लेकिन संतोषजनक बात यह है कि 2025-26 के मार्केटिंग सीजन में चीनी का घरेलू उत्पादन बेहतर होने की उम्मीद है और इसलिए उपलब्धता के अभाव का गंभीर संकट पैदा नहीं होगा। इसके फलस्वरूप बाजार भाव में भी काफी हद तक स्थिरता बनी रह सकती है।

गन्ना के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में पहले ही 15 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी की घोषणा हो चुकी है जिससे 10.25 प्रतिशत चीनी की औसत रिकवरी वाली किस्म के गन्ना का एफआरपी  340 रुपए से बढ़कर 355 रुपए प्रति क्विंटल हो जाएगा।

यह एफआरपी 2025-26 के मार्केटिंग सीजन के लिए प्रभावी होगा। इससे गन्ना बिजाई क्षेत्र में 8-10 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है।

पिछले साल मानसून सीजन के दौरान हुई अच्छी वर्षा से गन्ना की इस फसल को फायदा हुआ है जिसकी परिपक्वता अवधि लम्बी होती है।

इस वर्ष भी मानसून की अच्छी वर्षा होने की उम्मीद है जिससे गन्ना का उत्पादन बेहतर होने तथा चीनी मिलों को अधिक मात्रा में कच्चा माल प्राप्त होने की संभावना  है। इससे चीनी का उत्पादन बढ़ सकता है।