चीन में चावल निर्यात के विवाद में वाणिज्य मंत्री से हस्तक्षेप का आग्रह
18-Aug-2026 04:22 PM
नई दिल्ली। चीन में भारतीय चावल की खेपों को यह कहते हुए अस्वीकार किया जा रहा है कि उसमें जीएम चावल का अंश मौजूद है। इसी बहाने के आधार पर चीन की सरकार ने 5-6 भारतीय चावल निर्यातकों का लाइसेंस भी स्थगित कर दिया है। इससे निर्यातकों में दहशत का माहौल पैदा हो गया है और वे केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह कर रहे हैं।
राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ के अनुसार चीन ने सात भारतीय चावल निर्यातकों का रजिस्ट्रेशन स्थगित कर दिया है जबकि उसने जो आरोप लगाए हैं वे पूरी तरह आधारहीन और गलत हैं। केन्द्र सरकार को चीन के समक्ष मजबूती से यह मुद्दा उठाना चाहिए क्योंकि सर्वज्ञात तथ्य है कि भारत में जीएम चावल का उत्पादन, कारोबार, उपयोग एवं आयात नहीं होता है।
एसोसिएशन के अनुसार भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद तथा जेनेटिक इंजीनियरिंग एप्रेजल कमिटी द्वारा पहले ही स्पस्टीकरण दिया जा चुका है कि भारत में जीएम चावल के व्यावसायिक उत्पादन की अनुमति नहीं दी गई है। इतना ही नहीं बल्कि जीएम चावल के अंश की उपस्थिति के बहाने जिन खेपों को नामंजूर किया गया है उसकी जांच-पड़ताल भारतीय बंदरगाहों पर शिपमेंट से पहले ही कर ली गई थी और स्वयं चाइनीज एजेंसी ने उसे क्लीयरेंस दिया था।
यह तकनीकी विसंगति का मामला है। भारत में खेपों को जीएम चावल से मुक्त घोषित किया जाता है जबकि चीन में इसमें जीएम चावल की मौजूदगी की शिकायत की जाती है। भारत सरकार को चीन के साथ इस मसले पर विस्तृत विचार-विमर्श करने तथा समस्या का समाधान तलाशने का प्रयास करना चाहिए। उपयुक्त तकनीकी परीक्षण एवं सत्यापन के लिए भारत सहमत और तैयार है।
