चना, मसूर एवं सरसों का औसत भाव मार्च-अप्रैल में रहा कमजोर
07-May-2025 08:41 PM
नई दिल्ली। वर्ष 2022 में मार्च-अप्रैल के दौरान चना मसूर एवं सरसों का औसत थोक मंडी भाव संयुक्त रूप से न्यूनतम समर्थन मूल्य की तुलना में 2 से 8 प्रतिशत तक नीचे चल रहा था और वही कहानी वर्ष 2025 में देखी गई जब यह औसत मूल्य 2 से 9 प्रतिशत तक नीचे रही।
किसान संगठनों द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य की वैधानिक गारंटी के लिए पिछले कई वर्षों से संघर्ष किया जा रहा है। इन संगठनों का कहना है कि वर्तमान खरीद प्रणाली किसानों के लिए अनुकूल नहीं है क्योंकि सरकार कुल उत्पादन का एक छोटा हिस्सा ही समर्थन मूल्य पर खरीद रही है जबकि किसानों को अपना शेष उत्पादन नीचे दाम पर बेचने के लिए विवश होना पड़ता है।
यदि न्यूतनम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की वैधानिक गारंटी लागू हो जाये तो उद्योग-व्यापार क्षेत्र को भी किसानों से इस पर कृषि उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
चना का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2024-25 के रबी सीजन हेतु 5650 रुपए प्रति क्विंटल नियत किया गया है जबकि मार्च-अप्रैल में इसका औसत मंडी भाव 2.4 प्रतिशत नीचे यानी 5514 रुपए प्रति क्विंटल दर्ज किया गया।
इसी तरह मसूर का थोक मंडी भाव 6127 रुपए प्रति क्विंटल रहा जो 6700 रुपए प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य से 8.6 प्रतिशत नीचे था। जहां तक सरसों की बात है
तो इसका थोक मंडी भाव भी 5950 रुपए प्रति क्विंटल के न्यूतनम समर्थन मूल्य की तुलना में 42 प्रतिशत नीचे यानी 5702 रुपए प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। यह औसत मूल्य दोनों महीनों मार्च तथा अप्रैल में प्रचलित थोक बाजार का संयुक्त रूप से औसत भाव है।
मार्च में चना का औसत मूल्य 5434 रुपए प्रति क्विंटल था जो अप्रैल में सुधरकर 5585 रुपए प्रति क्विंटल हो गया और इस तरह इसमें 151 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई।
इसी तरह मार्च के मुकाबले अप्रैल में मसूर का औसत मंडी मूल्य में 278 रुपए प्रति क्विंटल तथा सरसों के औसत मंडी भाव में 238 रुपए प्रति क्विंटल का इजाफा दर्ज किया गया।
