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02-Nov-2026 05:59 PM
नई दिल्ली। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में अच्छी बढ़ोत्तरी होने तथा बाजार भाव ऊंचे स्तर पर मजबूत रहने के बावजूद खरीफ सीजन के दोनों प्रमुख दलहन चना तथा मसूर की बिजाई की गति काफी धीमी देखी जा रही है क्योंकि मिटटी और मौसम अभी बिजाई के लिए अनुकूल नहीं है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के नवीनतम साप्ताहिक आंकड़ों से पता चलता है कि इस वर्ष 30 अक्टूबर तक रबी कालीन दलहन फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 9.45 लाख हेक्टेयर पर ही पहुंच सका जो गत वर्ष की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 19.56 लाख हेक्टेयर से 10.11 लाख हेक्टेयर या 51.7 प्रतिशत कम है।
इसके तहत चना का उत्पादन क्षेत्र 1435 लाख हेक्टेयर से 59 प्रतिशत लुढ़ककर 5.90 लाख हेक्टेयर तथा मसूर का बिजाई क्षेत्र 2.14 लाख हेक्टेयर से 48.51 प्रतिशत घटकर 1.00 लाख हेक्टेयर पर अटक गया। मूंग का रकबा 1000 हेक्टेयर पर स्थिर रहा जबकि उड़द का क्षेत्रफल 21 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 29 हजार हेक्टेयर पर पहुंच गया। इसके अलावा रबी सीजन में मटर सहित कुछ अन्य दलहनों की भी खेती होती है।
चना के शीर्ष उत्पादक प्रांतों में मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक एवं गुजरात तथा मसूर के प्रमुख उत्पादक प्रांतों में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार एवं बंगाल आदि शामिल है। मटर का उत्पादन इन प्रांतों के साथ कुछ अन्य प्रांतों में भी होता है। जहां तक मूंग एवं उड़द की बात है तो इसकी बिजाई खरीफ, रबी और जायद- तीनों सीजन में होती है।
महाराष्ट्र और कर्नाटक भयंकर सूखे की चपेट में है। तेलंगाना में भी सूखे का गंभीर प्रकोप है। इसके अलावा राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश जैसे प्रांतों के विभिन्न भागों में मानसूनी वर्षा का असमान वितरण हुआ है।