चावल की बेहतर पोजीशन से केन्द्रीय पूल में 500 लाख टन खाद्यान्न का स्टॉक
16-Apr-2025 10:51 AM
नई दिल्ली। खरीफ कालीन धान की कस्टम मिलिंग जारी रहने के कारण भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को राइस मिलर्स की ओर से चावल का स्टॉक लगातार प्राप्त हो रहा है जिससे केन्द्रीय पूल में इसकी मात्रा बढ़ रही है।
अब रबी कालीन धान की सरकारी खरीद का मार्केटिंग सीजन भी औपचारिक तौर पर 1 अप्रैल से आरंभ हो गया है। इसके अलावा गेहूं की जोरदार सरकारी खरीद भी होने लगी है जिससे इसका स्टॉक बढ़ने के आसार हैं। कस्टम मिलिंग के लिए राइस मिलर्स के पास धान का भी अच्छा स्टॉक मौजूद है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 1 अप्रैल 2025 को केन्द्रीय पूल में कुल 500.03 लाख टन खाद्यान्न का स्टॉक मौजूद था जो 1 मार्च 2025 को उपलब्ध स्टॉक 501.98 लाख टन से कुछ कम मगर 1 अप्रैल 2024 को मौजूदा स्टॉक 376.59 लाख टन से काफी अधिक था।
उल्लेखनीय है कि पिछले साल गेहूं का स्टॉक घटकर काफी नीचे आ गया था। 1 अप्रैल 2023 को 332.05 लाख टन खाद्यान्न का स्टॉक रहा था।
मार्च की तुलना में अप्रैल के आरंभ में भारतीय खाद्य निगम के पास चावल का स्टॉक 367.92 लाख टन से बढ़कर 382.09 लाख टन पर पहुंचा मगर गेहूं का स्टॉक 134.06 लाख टन से घटकर 117.94 लाख टन रह गया।
फिर भी गेहूं का स्टॉक न केवल न्यूनतम आवश्यक बफर मात्रा से बल्कि 1 अप्रैल को उपलब्ध स्टॉक 75.02 लाख टन से काफी अधिक है। सरकार ने चालू वर्ष के लिए 312 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य रखा है और यदि यह हासिल हो गया तो केन्द्रीय पूल में इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न के स्टॉक की पोजीशन काफी मजबूत हो जाएगी। वहां चावल का विशाल भंडार पहले से ही मौजूद है।
इससे सरकार को घरेलू बाजार में आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ाने तथा कीमतों में तेजी पर अंकुश लगाने हेतु प्रभावी ढंग से हस्तक्षेप करने में सफलता मिल सकती है।
2023-24 के वित्त वर्ष में खुले बाजार बिक्री योजना के तहत सरकारी गोदामों से लगभग 100 लाख टन गेहूं बेचा गया था जबकि 2024-25 में केवल 30 लाख टन की बिक्री होने से गेहूं का स्टॉक कुछ ऊंचे स्तर पर बरकरार रहा।
इसके अलावा 1 अप्रैल 2025 को केन्द्रीय पूल में 371.51 लाख टन धान तथा 1.31 लाख टन मोटे अनाजों का स्टॉक भी मौजूद था। इस धान की मिलिंग से खाद्य निगम को चावल प्राप्त होता रहेगा।
