छत्तीसगढ़ में चावल निर्यातकों को नए साल का तोहफा- मंडी शुल्क से मिलेगी छूट

04-Jan-2025 12:12 PM

रामपुर । हाल के वर्षों में छत्तीसगढ़ एक ऐसे राज्य के रूप में उभरा है जो न केवल केन्द्रीय पूल में धान-चावल की विशाल मात्रा का योगदान दे रहा है बल्कि जहां से विदेशों में भारी मात्रा में चावल का निर्यात किया जाता है।

छत्तीसगढ़ वस्तुतः पंजाब के बाद केन्द्रीय पूल में चावल का योगदान देने वाला दूसरा सबसे अग्रणी राज्य हो गया है। वहां चावल उद्योग का तेजी से विकास-विस्तार हो रहा है और धान के उत्पादन में शानदार बढ़ोत्तरी हो रही है। 

छत्तीसगढ़ सरकार ने चावल उद्योग को बढ़ावा देने तथा गैर बासमती चावल के मंडी शुल्क (मार्केट फीस) एवं कृषक कल्याण शुल्क से पूरी तरह छूट देने का फैसला किया है।

इससे निर्यातकों को अपने चावल का निर्यात ऑफर मूल्य और भी आकर्षक या प्रतिस्पर्धी स्तर पर रखने में सहायता मिलेगी जिससे इसके शिपमेंट में अच्छी बढ़ोतरी हो सकती है। 

शुल्क में छूट का लाभ केवल उन निर्यातकों को प्राप्त होगा जो छत्तीसगढ़ के राइस मिलर्स से अथवा मंडियों में खरीदे गए धान से तैयार गैर बासमती चावल का शिपमेंट करेंगे।

इससे छत्तीसगढ़ के धान उत्पादकों तथा राइस मिलर्स को भी काफी राहत मिलेगी। छत्तीसगढ़ धान-चावल के अधिशेष उत्पादन वाला राज्य है।

वहां धान उत्पादकों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से ऊपर राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सब्सिडी भी दी जाती है जिससे वहां इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। 

चावल निर्यातकों को फिलहाल एक वर्ष की अवधि के लिए शुल्क में छूट देने का निर्णय लिया गया है और आवश्यक होने पर इसकी समय सीमा आगे बढ़ाई जा सकती है। राज्य से बड़े पैमाने पर चावल का निर्यात हो रहा है और आगे भी इसका सिलसिला जारी रहेगा। 

छत्तीसगढ़ में 50 लाख टन से अधिक चावल के समतुल्य धान की सरकारी खरीद हो चुकी है और इसकी प्रक्रिया अभी जारी है।