एमएसपी पर कपास खरीदने की जोरदार तैयारी
23-Sep-2025 03:54 PM
नई दिल्ली। हालांकि पिछले साल की तुलना में चालू खरीफ सीजन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर कपास की बिजाई में करीब 2.85 लाख हेक्टेयर की गिरावट आई है और इसका रकबा 112.48 लाख हेक्टेयर से घटकर 109.65 लाख हेक्टेयर पर अटक गया है
जबकि कहीं-कहीं बाढ़-वर्षा से फसल को नुकसान होने की आशंका भी है लेकिन इसके बावजूद उद्योग- व्यापार क्षेत्र के अनेक समीक्षकों का मानना है कि कपास का कुल घरेलू उत्पादन 2024-25 सीजन के बराबर या उससे कुछ अधिक हो सकता है क्योंकि बची हुई फसल की हालत उत्साहवर्धक है।
अगले महीने (अक्टूबर) से देश के सभी प्रमुख उत्पादक राज्यों में कपास के नए माल की जोरदार आपूर्ति शुरू हो जाएगी और तब कीमतों पर दबाव बढ़ने लगेगा।
विदेशों से शुल्क मुक्त सस्ती रूई का विशाल आयात जारी है और 31 दिसम्बर 2025 तक इसका सिलसिला बरकरार रहेगा। इससे भी स्वदेशी रूई की मांग एवं कीमत कमजोर पड़ सकती है।
अमरीका में भारतीय वस्त्र उत्पादों पर 50 प्रतिशत का भारी-भरकम टैरिफ लागू होने से स्वदेशी टैक्सटाइल उद्योग को लागत खर्च घटाने की आवश्यकता महसूस हो रही है और इसलिए वह ऊंचे दाम पर किसानों से कपास की खरीद में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाएगा।
केन्द्र सरकार ने कपास के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 589 रुपए प्रति क्विंटल का भारी इजाफा कर दिया है जिसमें मीडियम रेशे वाली श्रेणी का समर्थन मूल्य 7121 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़कर 8110 रुपए प्रति क्विंटल हो गया है।
चूंकि आपूर्ति के पीक सीजन (अक्टूबर-दिसम्बर) में कपास का थोक मंडी भाव एमएसपी से नीचे रहने की संभावना है इसलिए सरकारी एजेंसी- भारतीय कपास निगम (सीसीआई) द्वारा इसकी विशाल खरीद के लिए तैयारी की गई है ताकि किसानों को औने-पौने दाम पर अपना उत्पाद बेचने के लिए विवश न होना पड़े।
