एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम में नाटकीय बदलाव करने पर जोर

17-Feb-2025 05:12 PM

नई दिल्ली । भारत का एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम (ईवीपी) जीवश्म ईंधन (पेट्रोलियम) के आयात पर निर्भरता घटाने तथा कृषि क्षेत्र को संवर्धित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है जो फिलहाल नाटकीय परिवर्तनीय के दौर से गुजर रहा है।

शुरुआती चरण में मुख्यत: गन्ना से निर्मित एथनॉल पर ध्यान केन्द्रित किया गया था। लेकिन धीरे-धीरे इस नीति में बदलाव होने लगा और अब अनाज- खासकर चावल तथा मक्का का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होने लगा है।

भारतीय चीनी उद्योग, किसान तथा देश के जैव ईंधन क्षेत्र पर इसका गहरा सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है। 

लेकिन चीनी उद्योग के लिए एक प्रमुख चुनौती गन्ना जूस-सीरप तथा बी-हैवी शीरा से निर्मित एथनॉल के दाम में स्थिरता की है।

हालांकि सी-हैवी शीरा से निर्मित एथनॉल की कीमत में थोड़ी बढ़ोत्तरी की गई है और डिस्टीलरीज के लिए सरकारी चावल का दाम भी घटाकर 2250 रुपए प्रति क्विंटल नियत किया गया है ताकि इससे निर्मित एथनॉल के लागत खर्च में बढ़ोत्तरी न हो सके।

लेकिन गन्ना के उचित एवं लाभप्रद मूल्य (एफआरपी) में नियमित रूप से वृद्धि किए जाने के बावजूद गन्ना जूस एवं बी हैवी शीरा से निर्मित एथनॉल के मूल्य में कोई इजाफा नहीं होने से उद्योग चिंतित है।

उसका कहना है कि लागत खर्च के अनुरूप एथनॉल की कीमत बढ़नी चाहिए। पिछले तीन साल से इसमें कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है।

एथनॉल के दाम में स्थिरता, लागत खर्च में वृद्धि एवं चीनी के भाव में उतार-चढ़ाव के कारण चीनी मिलों पर वित्तीय दबाव काफी बढ़ गया है।

सी-हैवी शीरा   से निर्मित एथनॉल का दाम बढ़ाया गया है क्योंकि इस शीरा में चीनी का अंश बहुत कम होता है। तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) एथनॉल आपूर्ति के लिए नियमित रूप से टेंडर जारी कर रही हैं लेकिन उसकी प्राथमिकता में बदलाव आ गया है। वह आकर्षक कीमत वाले एथनॉल की खरीद पर विशेष ध्यान दे रही है।

इधर सरकार अनाज आधारित एथनॉल का उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर दे रही है ताकि मक्का के उत्पादन में भारी बढ़ोत्तरी हो सके।

सरकार के पास चावल का अत्यन्त विशाल स्टॉक पहले से ही मौजूद है जिसमें से 24 लाख टन का स्टॉक एथनॉल निर्माण के लिए आवंटित किया गया है। जरूरत पड़ने पर इसकी मात्रा बढ़ाई जा सकती है।