एथनॉल निर्माण के लिए खाद्य निगम के स्टॉक से टुकड़ी चावल को अलग करने का प्लान
28-Jul-2025 01:54 PM
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने भारतीय खाद्य निगम के 50 लाख टन चावल के स्टॉक से टूटे माल को अलग करने का प्लान बनाया है ताकि शेष चावल की क्वालिटी में सुधार आ सके और इसका बाजार मूल्य भी बढ़ सके।
क्षेत्र के चार राज्यों में इसका प्रायोगिक परीक्षण (पायलट प्रोजेक्ट) सफल हो चुका जिससे उत्साहित होकर सरकार अब विशाल स्टॉक में टूटे चावल को अलग करके इसे एथनॉल निर्माण के लिए आवंटित करना चाहती है। 10 प्रतिशत टूट के अंश वाले उच्च क्वालिटी के चावल की नीलामी ओएमएसएस के माध्यम से की जाएगी जबकि 100 प्रतिशत टूटे चावल की आपूर्ति सीधे एथनॉल डिस्टीलरीज को कुछ कम दाम पर की जाएगी।
वर्ष 2024 में खाद्य निगम ने पंजाब, हरियाणा, तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश के चुनिंदा राइस मिलों को कस्टम मिल राइस (सीएमआर) स्कीम के अंतर्गत प्रसंस्कृत 10 हजार टन चावल में से 15 प्रतिशत टूटे दाने को अलग करने का निर्देश दिया था।
प्रत्येक राज्य के लिए 10-10 हजार टन चावल का स्टॉक नियत हुआ था जिसमें से टूटे दाने को अलग करना था। यह योजना सफल रही। इसका उद्देश्य केन्द्रीय पूल के लिए खरीदे जाने वाले चावल के स्टॉक में से टूटे दाने को अलग करना है। आमतौर पर इसमें 25 प्रतिशत टूटे दाने का अंश रहता है। यदि 15 प्रतिशत अंश निकल गया तो उसमें 10 प्रतिशत अंश ही रह जाएगा।
10 प्रतिशत टूट के अंश वाले चावल को यदि खुले बाजार बिक्री योजना के अंतर्गत उतारा गया तो इसकी खरीद में खरीदारों की दिलचस्पी बढ़ सकती है और इसका दाम भी कुछ ऊंचा रह सकता है।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने अनाज आधारित डिस्टीरीज एथनॉल निर्माण के लिए कुल मिलाकर 52 लाख टन चावल का स्टॉक आवंटित किया है।
सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि चावल का यह कुल आवंटित स्टॉक 100 प्रतिशत टुकड़ा वाला हो। नए मॉडल के अंतर्गत मिलर्स यदि 15 प्रतिशत टूटे दाने को अलग कर देते हैं तो शेष स्टॉक में केवल 10 प्रतिशत टूटे चावल की मात्रा ही रह जाएगी।
