एथनॉल निर्माण के लिए सरकारी चावल का आवंटन बढ़ाकर 52 लाख टन नियत किया गया
08-May-2025 12:20 PM
नई दिल्ली। अकबर के दरबारी कवि रहीम का एक "जो जल बाढ़े नाव में, घर में बाढ़े दाम,
दोऊ हाथ उलीचिए, यही सयानो काम। "इसका अर्थ होता है कि यदि नाव में पानी भर जाए तो और घर में धन सम्पत्ति का अम्बार लग जाये तो उसे दोनों हाथों से बाहर निकालना चाहिए।
चावल के सरकारी स्टॉक और उसके वितरण-विपणन की स्थिति पर यह दोहा पूरी तरह सटीक और चरितार्थ प्रतीत होता है। केन्द्रीय पूल में चावल का अत्यन्त विशाल स्टॉक मौजूद है और सरकार इसे घटाने का हर संभव प्रयास कर रही है।
इसी शृंखला की एक कड़ी के रूप में उसने एथनॉल निर्माण के लिए चावल के आवंटित कोटे में दोगुने से भी ज्यादा की कटौती कर दी है।
केन्द्र सरकार ने एथनॉल निर्माताओं के लिए पहले अपने स्टॉक से 24 लाख टन चावल का कोटा आवंटित किया था जिसे अब 28 लाख टन बढ़ाकर 52 लाख टन निर्धारित कर दिया है।
इसके बिक्री मूल्य में कोई बदलाव नहीं किया गया है और यह 2250 रुपए प्रति क्विंटल के पुराने स्तर पर ही बरकरार है। इसका मतलब यह हुआ कि अनाज आधारित डिस्टीलरीज को अब 22,500 रुपए प्रति टन के मूल्य स्तर पर भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के गोदामों से 52 लाख टन तक चावल खरीदने का अवसर मिल जाएगा। इससे एथनॉल उत्पादन में अच्छी बढ़ोत्तरी हो सकती है।
ध्यान देने की बात है कि भारतीय खाद्य निगम द्वारा पहले जो 24 लाख टन चावल की बिक्री का कोटा आवंटित किया गया था उसमें से 10 लाख टन से भी कम चावल का अभी तक उठाव संभव हो पाया है।
आवंटित कोटे की पूरी बिक्री होने से पूर्व ही यह नया 28 लाख टन का कोटा उसे अलग से आवंटित कर दिया गया है। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि सरकार केन्द्रीय पूल में मौजूद चावल के विशाल स्टॉक को घटाने के लिए बुरी तरह बेचैन है क्योंकि खाद्यान्न के सुरक्षित भंडारण का गंभीर संकट उत्पन्न होने की आशंका है।
एथनॉल डिस्टीलरीज के लिए 52 लाख टन चावल का यह आवंटित कोटा 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन के लिए स्वीकृत हुआ है। मौजूदा मार्केटिंग सीजन 1 नवम्बर 2024 से आरंभ हो चुका है और 31 अक्टूबर 2025 तक जारी रहेगा। लगभग 10 लाख टन की बिक्री हो चुकी है जबकि शेष 42 लाख टन का कोटा अगले सात महीनों के लिए उपलब्ध रहेगा।
