फरवरी 2025 तक 51.50 लाख टन सोयाबीन की क्रशिंग
11-Mar-2025 05:47 PM
इंदौर। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) में अक्टूबर 2024 से फरवरी 2025 के पांच महीनों के दौरान देश में कुल 66 लाख टन सोयाबीन की आवक हुई जिसमें से 51.50 लाख टन की क्रशिंग हो गई। पिछले मार्केटिंग सीजन की समान अवधि में 70 लाख टन सोयाबीन की आपूर्ति एवं 57 लाख टन की क्रशिंग हुई थी।
सोपा के मुताबिक अक्टूबर 2024- फरवरी 2025 के दौरान 2.20 लाख टन सोयाबीन की सीधी (साबुत रूप में) खपत हुई और 6 हजार टन का निर्यात किया गया।
इसके पश्चात 1 मार्च 2025 को उत्पादकों एवं प्लांटर्स के पास 48.01 लाख टन सोयाबीन का स्टॉक बच गया।
2023-24 के मार्केटिंग सीजन की इसी अवधि में 2 लाख टन सोयाबीन का घरेलू प्रत्यक्ष उपयोग तथा 3 हजार टन का निर्यात हुआ था और 1 मार्च 2024 को उत्पादकों / प्लांटर्स के पास 73.96 लाख टन का स्टॉक बचा हुआ था।
जहां तक सोया मील का सवाल है तो सीजन के आरंभ में इसका 1.33 लाख टन का पुराना स्टॉक बचा हुआ था जबकि सीजन के दौरान फरवरी 2025 के अंत तक 40.64 लाख टन का उत्पादन हुआ।
इसमें से 9.50 लाख टन का निर्यात तथा 31.15 लाख टन का घरेलू उपयोग हुआ और मार्च के आरंभ में 1.32 लाख टन का स्टॉक बच गया।
घरेलू उपयोग के तहत 3.65 लाख टन सोयामील की खपत खाद्य उद्देश्य में तथा 27.50 लाख टन की खपत पशु आहार (फीड) निर्माण में हुई।
2023-24 सीजन की समान अवधि के दौरान 1.17 लाख टन सोया मील का पिछला बकाया स्टॉक उपलब्ध था जबकि 13 हजार टन का आयात एवं 44.98 लाख टन का घरेलू उत्पादन हुआ था।
इस कुल उपलब्धता में से 11.71 लाख टन सोया मील का निर्यात हुआ। इसके अलावा घरेलू प्रभाग में खाद्य उद्देश्य में 3.75 लाख टन तथा फीड निर्माण में 29.50 लाख टन सोया मील की खपत हुई थी और मार्च 2024 के आरंभ में 1.32 लाख टन का स्टॉक बच गया था।
2023-24 के मुकाबले 2024-25 के मौजूदा मार्केटिंग सीजन के दौरान मंडियों में सोयाबीन की कम आवक हो रही है क्योंकि इसका भाव सरकारी समर्थन मूल्य से काफी नीचे चल रहा है। सरकारी एजेंसियों द्वारा सोयाबीन की भारी खरीद की गई है।
