फसल को क्षति के बावजूद तेलंगाना में लालमिर्च का भाव घटने से उत्पादक चिंतित

12-Jan-2024 03:41 PM

वारंगल । नए माल की आवक जोर पकड़ने तथा मांग एवं उठाव की गति सुस्त रहने से पिछले दो माह के दौरान लालमिर्च के दाम में 16 से 25 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आ चुकी है जिससे खासकर तेलंगाना के उत्पादन काफी चिंतित और परेशान हैं।

वहीं किसानों का कहना है कि कीड़ों एवं रोगों के घातक प्रकोप से लालमिर्च की फसल क्षतिग्रत हो गई है और अब कीमतों में भारी गिरावट आ गई है। इससे उत्पादकों को दोहरा नुकसान हो रहा है।

तेलंगाना में खम्माम एवं वारंगल जिले के किसानों का दावा है कि ब्लैक थ्रिप्स तथा बिलटिंग रोग के कारण लालमिर्च की फसल क्षतिग्रस्त हो गई जिससे इसकी उपज दर एवं क्वालिटी प्रभावित हुई है। 

तेलंगाना कृषि विपणन विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि वारंगल मंडी में तेजा वैरायटी की लालमिर्च का मॉडल मूल्य (जिस पर सर्वाधिक कारोबार होता है) दो माह पूर्व 21,500 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा था जो अब घटकर 18,000 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गया है।

इसी तरह वंडरहॉट वैरायटी की लालमिर्च का मॉडल मूल्य समीक्षाधीन अवधि में 24,000 रुपए प्रति क्विंटल से लुढ़ककर 18,000 रुपए प्रति क्विंटल रह गया है।

पिछले साल की समान अवधि में तेजा वैरायटी का भाव 19,150 रुपए प्रति क्विंटल एवं वंडरहॉट वैरायटी का दाम 34,000 रुपए प्रति क्विंटल था। 

किसानों द्वारा कीड़ों-रोगों से लालमिर्च की फसल को नुकसान पहुंचने की शिकायत किए जाने के बाद तेलंगाना सरकार ने खम्माम एवं वारंगल जिलों में कृषि वैज्ञानिकों की टीम तैनात कर दी है।

तेलंगाना में लालमिर्च का सर्वाधिक उत्पादन इन्हीं  दो जिलों में होता है। कृषि विशेषज्ञों का दल वहां फसल पर कीड़ों-रोगों के प्रकोप एवं प्रभाव का अध्ययन आंकलन करेगा। 

कीमतों में भारी गिरावट आने से चिंतित एवं परेशान उत्पादकों ने सरकार से लालमिर्च का दाम 25,000 रुपए प्रति क्विंटल निश्चित करने की मांग की है।

उसकी शिकायत यह भी है की मंडियों में उन्हें कच्चा सौदा करना पड़ रहा है जहां उसे महज 13,000-16,000 रुपए प्रति क्विंटल की दर से मूल्य प्राप्त हो रहा है।

उत्पादकों के अनुसार जब दिन में कारोबार की शुरूआत होती है तब व्यापारी लालमिर्च के ऊंचे दाम की घोषणा करते हैं लेकिन जैसे-जैसे व्यापारिक गतिविधि आगे बढ़ती  है वैसे-वैसे खरीद मूल्य भी घटता जाता है।

सुबह के सत्र में 24000/25000 रुपए प्रति क्विंटल तक के मूल्य की घोषणा  होती है और बाद में उत्पाद की कमजोर क्वालिटी का बहाना करके दाम घटा दिया जाता है जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है।