फसल विविधिकरण के लिए वित्तीय सहायता की जरूरत पर जोर

12-May-2026 05:20 PM

हैदराबाद। दक्षिण भारत के एक महत्वपूर्ण कृषि उत्पादक राज्य- तेलंगाना में खरीफ सीजन के दौरान मुख्यतः धान, मक्का एवं कपास का उत्पादन होता है और दलहन, तिलहन तथा अन्य मोटे अनाजों की खेती सीमित क्षेत्रफल में होती है राज्य सरकार अब धान का रकबा घटाकर दलहन तिलहन फसलों का क्षेत्रफल बढ़ाने हेतु फसल विविधिकरण योजना पर विशेष जोर दे रही है।

तेलंगाना किसान आयोग ने भी राज्य सरकार को इस योजना का विकास-विस्तार करने के लिए कहा है। आयोग ने इसमें दलहनों एवं तिलहनों के साथ सब्जियों की फसल को भी शामिल करने का सुझाव दिया है ताकि एकल फसलीय कृषि प्रणाली से किसानों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। इसके अलावा आयोग ने राज्य में हल्दी और गन्ना जैसी परम्परागत फसलों की खेती को भी प्रोत्साहित करने की जरूरत पर जोर दिया है।

सरकार को सौंपे अपनी 40 पेज की रिपोर्ट में आयोग ने कहा है कि सभी वैकल्पिक फसलों के लिए मूल्य समर्थन एवं बीमा कवर का प्रबंध होना आवश्यक है तभी किसानों का उत्साह एवं आकर्षण इन फसलों की तरफ बढ़ सकता है। तेलंगाना को फसलों की अदला बदली (विविधिकरण) योजना की सख्त आवश्यकता है क्योंकि वहां धान-चावल की खरीद के मुद्दे पर अक्सर केन्द्र के साथ विवाद बना रहता है।

इसी तरह रूई का खुला बाजार भाव भी सरकारी समर्थन मूल्य से काफी नीचे रहने के कारण केन्द्रीय एजेंसी- भारतीय कपास निगम (सीसीआई) को किसानों से विशाल मात्रा में इसकी खरीद करनी पड़ती है। सरकार को मक्का की भारी खरीद के लिए भी विवश होना पड़ता है।

तेलंगाना में पहले गन्ना का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता था मगर अब उसके क्षेत्रफल का दायरा सिमटता जा रहा है। वहां हल्दी के उत्पादन के प्रति भी किसानों की दिलचस्पी घटती जा रही है।