गेहूं का स्टॉक पोजीशन बेहतर मगर क्वालिटी की समस्या कायम
12-May-2026 07:39 PM
नई दिल्ली। विशाल पिछला बकाया स्टॉक एवं खरीद में हो रही प्रगति की बदौलत केन्द्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक बढ़कर न्यूनतम आवश्यक बफर मात्रा से काफी ऊपर पहुंच गया है लेकिन इसमें रियायती गुणवत्ता नियम के तहत खरीदे गए यूआरएस गेहूं की भारी-भरकम मात्रा भी शामिल है। इसकी बिक्री करने में सरकार को भारी कठिनाई हो सकती है। बदरंग, चमकहीन तथा टूटे-चिपटे दाने वाले गेहूं की आपूर्ति सार्वजनिक वितरण प्रणाली एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत करने पर सवाल और बवाल खड़े हो सकते हैं।
इस वर्ष पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान में खरीदे गए गेहूं का अधिकांश भाग यूआरएस संवर्ग का है। इसकी जीवनावधि छोटी होती है और लम्बे समय तक इसका सुरक्षित भंडारण नहीं किया जा सकता है।
राज्यों को इस गेहूं का भंडार सामान्य क्वालिटी वाले गेहूं से अलग रखने के लिए कहा गया है। इसकी बिक्री भी सम्बन्धित राज्यों में ही करने का प्लान है लेकिन इसमें कुछ व्यावहारिक कठिनाइयां है। पंजाब में 121 लाख टन तथा हरियाणा में 80 लाख टन गेहूं यूआरएस श्रेणी का है जबकि वहां इतनी मात्रा में गेहूं की खपत होना मुश्किल है। राजस्थान में भी 13 लाख टन से ज्यादा यूआरएस संवर्ग का गेहूं खरीदा गया है।
हालांकि केन्द्रीय खाद्य सचिव ने पिछले दिनों कहा था कि फ्लोर मिलर्स एवं प्रोसेसर्स को सरकारी स्टॉक पर आश्रित रहने के बजाए खुली मंडियों में किसानों से अधिक से अधिक मात्रा में गेहूं की खरीद करके आत्मनिर्भर बनने का प्रयास करना चाहिए
लेकिन साथ ही साथ उन्होंने यह भी कहा था कि जून में वास्तविक रूप से गेहूं की खरीद का सीजन समाप्त होने के बाद जुलाई में खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत सरकारी गेहूं बेचने के तौर-तरीकों का निर्धारण किया जा सकता है।
चूंकि इस बार केन्द्रीय पूल में यूआरएस गेहूं की मात्रा बहुत अधिक है इसलिए सरकार इसे जल्दी से जल्दी बेचने का प्रयास कर सकती है। इस पर उद्योग को गहरी नजर रखने की आवश्यकता है।
