गेहूं की फसल को फिलहाल तापमान से कोई खतरा नहीं
17-Feb-2025 02:47 PM
नई दिल्ली। हालांकि देश के कुछ भागों में दिन का तापमान काफी ऊंचा होता जा रहा है और बढ़ती गर्मी से गेहूं सहित अन्य रबी फसलों के प्रति चिंता बढ़ गई है लेकिन कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल दिन और रात का तापमान अधिकांश इलाकों में फसल की सहनशीलता सीमा के अंदर ही है इसलिए स्थिति चिंता जनक नहीं है।
लेकिन किसानों को अपने खेतों में हलकी सिचाई करते रहना चाहिए अन्यथा नमी के अभाव में फसल के सूखने का खतरा बढ़ सकता है।
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक देश के पश्चिमोत्तर क्षेत्र में गेहूं की फसल अभी विभिन्न चरणों से गुजर रही है जो इसकी बिजाई की अवधि पर आधारित है।
उच्चतम एवं न्यूनतम तापमान अभी फसलों के सहने की सीमा में ही है इसलिए गेहूं की उपज दर में गिरावट आने की आशंका अभी बहुत कम है। यदि तापमान आगे कुछ और बढ़ता भी है तब भी फसल को ज्यादा नुकसान नहीं होगा।
करनाल स्थित भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के एक पूर्व निदेशक का कहना हैं कि किसानों द्वारा गेहूं की जिन प्रजातियों की खेती की गई है उसमें से अनेक किस्मों में गर्मी सहने की क्षमता ज्यादा है और जब तक रात का तापमान कम रहेगा तथा न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहेगा तब तक गेहूं की फसल सुरक्षित रहेगी।
20 नवम्बर तक की आदर्श अवधि तक या उससे पूर्व जिन इलाकों में गेहूं की बिजाई हुई वहां फसल पहले ही काफी ऊंची हो चुकी है और कहीं-कहीं उसमें फूल और दाने भी लगने लगे हैं।
आमतौर पर शीश (हेडिंग) की उपस्थिति के बाद गेहूं की फसल को पकने या परिपक्व होने में करीब 50 दिन का समय लगता है।
जिन प्रजातियों की खेती हुई है उसमें 35 डिग्री सेल्सियस तक के उच्चतम (दिन के) तापमान को बर्दाश्त करने की क्षमता है लेकिन किसानों को नमी के अभाव वाले खेतों की हल्की सिंचाई समय-समय पर करते रहना चाहिए।
मौसम विभाग के अनुसार अगले 3-4 दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में क्रमिक रूप से देश के पश्चिमोत्तर एवं मध्यवर्ती भाग में 2-3 डिग्री सेल्सियस, राजस्थान में 1-3 डिग्री सेल्सियस तथा पूर्वी भारत में 2-3 डिग्री सेल्सियस का इजाफा हो सकता है।
इसी तरह उच्चतम तापमान में भी धीरे-धीरे बढ़ोत्तरी होने की संभावना है। इससे फसल की ज्यादा देखभाल करनी पड़ सकती है।
