गेहूं की कुल खरीद में यूआरएस की भागीदारी बहुत कम
30-Apr-2026 05:54 PM
नई दिल्ली। पहले काफी शोर मचाया जा रहा था कि बेमौसमी वर्षा, आंधी तूफान एवं ओलावृष्टि की वजह से गेहूं की क्वालिटी को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। इसके आधार पर केन्द्रीय खाद्य मंत्रालय ने पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान में गेहूं की सरकारी खरीद के लिए गुणवत्ता सम्बन्धी नियमों शर्तों में भारी छूट की घोषणा कर दी। लेकिन अब जो तथ्य सामने आए हैं उससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि सिर्फ राजस्थान को छोड़कर अन्य प्रांतों में गेहूं की क्वालिटी की सीमित क्षेत्रफल में क्षति हुई है।
इस बार केन्द्रीय पूल के लिए 28 अप्रैल 2026 तक कुल 212.09 लाख टन गेहूं खरीदा गया जिसमें सामान्य औसत क्वालिटी (एफएक्यू) वाले माल की भागीदारी 201.20 लाख टन या करीब 95 प्रतिशत तथा यूआरएस (भंडार रिफाइंड स्पेसिफिकेशन्स) वाले अनाज की हिस्सेदारी 10.85 लाख टन या 5 प्रतिशत रही। केन्द्रीय पूल में इस बार गेहूं का योगदान देने वाले दो अग्रणी राज्य-पंजाब एवं हरियाणा में गेहूं की क्वालिटी काफी अच्छी देखी जा रही है।
पंजाब में खरीदे गए 103.40 लाख टन गेहूं में यूआरएस वाले माल का अंश केवल 1.68 लाख टन रहा जबकि हरियाणा में तो इसकी मात्रा शून्य ही रही। पंजाब में 98 प्रतिशत तथा हरियाणा में 100 प्रतिशत गेहूं सामान्य औसत क्वालिटी वाला रहा। गेहूं की खरीद का लक्ष्य इस बार पंजाब में 122 लाख टन और हरियाणा में 72 लाख टन नियत हुआ है जबकि हरियाणा में वास्तविक खरीद इस लक्ष्य को पार करते हुए 74.26 लाख टन पर पहुंच गई।
मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान में गेहूं की सरकारी खरीद की गति गत वर्ष से धीमी है। उत्तर प्रदेश में 1.62 लाख टन यूआरएस गेहूं खरीदा गया है जो कुल सरकारी खरीद 6.10 लाख टन का 32 प्रतिशत है। मध्य प्रदेश में यूआरएस गेहूं की कोई खरीद नहीं हुई है मगर राजस्थान में इसकी खरीद 88 प्रतिशत पर पहुंच गई है।
