चीन के साथ जीएमओ चावल के मुद्दे पर एपीडा कर सकता है बातचीत
30-Apr-2026 04:08 PM
नई दिल्ली। केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की अधीनस्थ एजेंसी- कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) को केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की तरफ से सूचित किया गया है कि देश के अंदर जेनेटिकली मोडिफाइड ऑर्गेनिज्म (जीएमओ) चावल के उत्पादन, कारोबार, आयात एवं उपयोग की अनुमति नहीं दी गई है। इसके फलस्वरूप भारत से निर्यात होने वाला चावल पूरी तरह जीएमओ संवर्ग के दायरे से बाहर रहता है।
दूर / स्पष्टीकरण एवं सकारात्मक सूचना से उत्साहित एपीडा अब चीन के साथ जीएमओ चावल का मुद्दा उठाने की तैयारी कर रहा है। मालूम हो कि चीन ने भारतीय चावल की कुछ खेपों को यह कहते हुए नामंजूर कर दिया था कि उसमें जीएम चावल का अंश मौजूद है। इतना ही नहीं बल्कि उसने तीन भारतीय निर्यातकों का लाइसेंस भी रद्द कर दिया था जिससे वे निर्यातक चीन में चावल का शिपमेंट करने में सक्षम नहीं हो रहे है।
तमाम साक्ष्यों एवं स्पष्टीकरण के साथ एपीडा अब चीन सरकार के निर्णय को चुनौती देने का प्लान बना रहा है। पर्यावरण मंत्रालय ने 28 अप्रैल को एपीडा को भेजे एक कार्यालयी ज्ञापन में कहा है कि जीएम फसलों की नियामक संस्था- जेनेटिकली इंजीनियरिंग एप्रेजल कमिटी (जिएक) द्वारा भारत में जीएम चावल के बारे में किसी तरह की कोई अनुमति नहीं दी गई है। इससे पूर्व एपीडा ने मंत्रालय को एक पत्र भेजकर इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण देने का आग्रह किया था।
इससे पहले 23 अप्रैल को आईसीएआर ने भी एपीडा को इस विषय पर एक पत्र भेजा था जिसमें कहा गया था कि केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा देश में किसी जीएम चावल (धान) की व्यावसायिक खेती शुरू करने की अनुशंसा नहीं की गई है इसलिए इसकी अनुमति देने का सवाल ही नहीं उठता है। जीएमओ चावल पर देश में कहीं कोई अनुसंधान कार्य भी नहीं चल रहा है।
