अगस्त-सितम्बर में हो सकता है वर्षा का अभाव

30-Apr-2026 03:39 PM

तिरुअनन्तपुरम। खरीफ फसलों की बिजाई एवं प्रगति के दो महत्वपूर्ण माह- अगस्त-सितम्बर में इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश काफी कम होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। एक अग्रणी प्राइवेट मौसम एजेंसी के अनुसार अल नीनो के प्रभाव से सामान्य औसत के मुकाबले अगस्त में 60 प्रतिशत एवं सितम्बर में 70 प्रतिशत वर्षा हो सकती है। 

उल्लेखनीय है कि जून- जुलाई में जिस फसल की बिजाई होती है वह अगस्त-सितम्बर में शीर्ष वानस्पतिक चरण में पहुंचती है और फिर धीरे-धीरे उसमें फूल तथा दाना लगने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

ऐसे महत्वपूर्ण दौर में यदि वर्षा कम हुई या अनियमित रही तो फसलों की औसत उपज दर में भारी गिरावट आ सकती है। अक्टूबर से फसलों की जोरदार कटाई-तैयारी शुरू हो जाती है। इन दोनों महीनों में मौसम एवं मानसून की स्थिति पर खरीफ फसलों का उत्पादन काफी हद तक निर्भर करेगा। 

मौसम एजेंसी के अनुसार अल नीनो का असर जुलाई के अंतिम दिनों से बढ़ सकता है जिससे अगस्त में मानसून कमजोर पड़ने लगेगा। अगस्त-सितम्बर के दौरान देश के अधिकांश प्रमुख कृषि उत्पादक राज्यों में मानसून की बारिश अनिश्चित एवं अनियमित रह सकती है लेकिन बिहार, उड़ीसा एवं छत्तीसगढ़ जैसे प्रांतों में लगभग सामान्य वर्षा होने की उम्मीद है।