कनाडा को भारत में कमजोर मानसून से मसूर का आयात बढ़ने का भरोसा
30-Apr-2026 02:05 PM
सस्काटून। हालांकि भारत में खरीफ सीजन के दौरान मसूर की खेती नहीं होती है इसलिए मानसून के कमजोर पड़ने से इसका उत्पादन प्रभावित होने का सवाल ही नहीं उठता लेकिन परोक्ष रूप से इसका आयात बढ़ने की संभावना रहेगी।
दरअसल खरीफ सीजन में अरहर (तुवर), उड़द एवं मूंग का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है और यदि अल नीनो के प्रकोप तथा कमजोर मानसून के कारण इन दलहनों की पैदावार प्रभावित होती है तो तुवर एवं उड़द के साथ मसूर का आयात भी बढ़ाने की आवश्यकता पड़ सकती है।
मसूर को तुवर का एक अच्छा विकल्प माना जाता है। तुवर का उत्पादन घटने पर हरी मसूर का आयात बढ़ सकता है। स्वयं तुवर एवं उड़द के आयात में भी वृद्धि हो सकती है।
एक अग्रणी विश्लेषक के अनुसार कनाडा में मसूर का विशाल स्टॉक पहले से ही मौजूद है जबकि अगली नई फसल के लिए इसकी बिजाई भी आरंभ हो गई है। यदि भारत में आयात बढ़ने की संभावना पैदा हुई तो कनाडा के किसानों को काफी राहत मिल सकती है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने इस वर्ष देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा सामान्य औसत से 8 प्रतिशत बिंदु कम होने का अनुमान लगाया है। जून-सितम्बर में वर्षा का दीर्घकालीन औसत 870 मि०मी० आंका गया है जबकि कुल बारिश इसके 92 प्रतिशत तक सीमित रह सकती है।
भारत में खरीफ कालीन दलहन फसलों की बिजाई जून-जुलाई में शुरू होती है और सितम्बर-अक्टूबर में फसल कटने लगती है। कॉमोडिटी मार्केट की एक अग्रणी रिसर्च फर्म- आईग्रेन इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं प्रख्यात विश्लेषक राहुल चौहान का कहना है कि इस वर्ष खरीफ कालीन फसलों पर प्रतिकूल मौसम का गंभीर खतरा बना रह सकता है।
रबी सीजन के दौरान भी देश में पर्याप्त बारिश नहीं हुई। खेतों की मिटटी में नमी का अंश पहले से ही कम है जिससे खरीफ कालीन फसलों में अंकुरण के प्रति चिंता बनी रहेगी और इसकी अगैती बिजाई में भी समस्या रहेगी।
राहुल चौहान का कहना है कि यदि बारिश का अभाव रहा तो तुवर, उड़द एवं मूंग की पैदावार प्रभावित होगी, इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति जटिल रहेगी और दलहनों के आयात पर निर्भरता बढ़ जाएगी।
