गेहूं की कटाई-तैयारी का सीजन शुरू होने से मंडियों में बढ़ रही है आपूर्ति
07-Apr-2025 11:52 AM
नई दिल्ली। देश के लगभग सभी प्रमुख उत्पादक राज्यों- उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, बिहार, गुजरात एवं महाराष्ट्र आदि से रबी सीजन के सबसे प्रमुख खाद्यान्न- गेहूं की नई फसल की कटाई-तैयारी आरंभ हो चुकी है और अप्रैल-मई के दो महीनों में इसकी गति काफी तेज रहेगी।
नए माल की आवक शुरू होने से थोक मंडियों में तथा सरकारी क्रय केन्द्रों पर गेहूं की आपूर्ति बढ़ती जा रही है जिससे कीमतों पर दबाव पड़ने लगा है।
भारत संसार में गेहूं का दूसरा सबसे प्रमुख उत्पादक एवं उपभोक्ता देश है। यहां अक्टूबर-दिसम्बर के दौरान इसकी बिजाई तथा अप्रैल-मई में कटाई-तैयारी होती है।
2024-25 के रबी सीजन में गेहूं के बिजाई क्षेत्र में करीब 5 लाख हेक्टेयर की बढ़ोत्तरी हुई जबकि मौसम की हालत भी काफी हद तक फसल के लिए अनुकूल बनी रही।
इसके फलस्वरूप गेहूं के घरेलू उत्पादन में भारी बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद सरकारी तौर पर की जा रही है।
गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2023-24 सीजन के 2275 रुपए प्रति क्विंटल से 150 रुपए बढ़ाकर 2024-25 सीजन के लिए 2425 रुपए प्रति क्विंटल नियत किया गया है
जबकि मध्य प्रदेश में 175 रुपए एवं राजस्थान में 150 रुपए प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस देने की घोषणा की गई है। चूंकि थोक मंडी भाव नरम पड़ गया है इसलिए इन दोनों राज्यों मध्य प्रदेश में केन्द्रीय पूल के लिए गेहूं की भारी खरीद हो रही है।
पिछले तीन सीजन से गेहूं की सरकारी खरीद नियत लक्ष्य से काफी कम हो रही है जिससे बाजार भाव में आने वाली तेजी को नियंत्रित करने में सरकार को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ा।
इस बार परिदृश्य कुछ भिन्न हो सकता है। सरकार ने 313 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है और उसे यह लक्ष्य आसानी से हासिल हो जाने का भरोसा है।
खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत 2023-24 के वित्त वर्ष में सरकारी स्टॉक से लगभग 100 लाख टन गेहूं बेचा गया था जबकि 2024-25 में केवल 30 लाख टन की बिक्री की गई। इसके परिणामस्वरूप इस बार केन्द्रीय पूल में गेहूं का पिछला बकाया स्टॉक भी अपेक्षाकृत ऊंचा है।
