गेहूं की लेट बिजाई से उपज दर में कमी आने की संभावना
04-Dec-2024 10:33 AM
लुधियाना । केन्द्रीय पूल में खाद्यान्न का सर्वाधिक योगदान देने वाले राज्य- पंजाब के गेहूं उत्पादक काफी चिंतित हैं क्योंकि रबी सीजन के इस सबसे महत्वपूर्ण अनाज की बिजाई में देर होने से इसकी औसत उपज दर प्रभावित होने की आशंका है।
दरअसल पंजाब में इस वर्ष धान की फसल की कटाई-तैयारी में देर हो गई और किसानों को अपना उत्पाद बेचने में भी कठिनाई हुई जिससे सही समय पर गेहूं की बोआई समाप्त करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाया।
दरअसल गेहूं की बिजाई में हुई देरी के कारण उसकी कटाई-तैयारी भी देर से होगी जबकि अप्रैल-मई में तापमान काफी ऊंचा रहेगा। मार्च से ही गर्मी बढ़ने लगती है जिससे फसल के पूर्ण विकास में बाधा पड़ती है।
इससे गेहूं के दाने चिपटे हो सकते हैं और उसकी उपज दर में गिरावट आ सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक अक्टूबर-नवम्बर में तापमान ऊंचा रहने तथा डीएपी उर्वरक का अभाव होने से भी गेहूं की बोआई में विलम्ब हो गया।
अनेक क्षेत्रों में जब गेहूं की बिजाई का आदर्श समय चल रहा था। तब खेतों में धान की फसल लगी हुई थी। खेत सूख गए थे इसलिए धान की कटाई के बाद मिटटी में नमी पैदा करने के लिए सिंचाई की व्यवस्था करनी पड़ी और फिर ज्यादा नमी के सूखने का इंतजार करना पड़ा।
इसके बाद कुछ दिनों के लिए कोहरे का भी प्रकोप देखा गया। इससे गेहूं की बिजाई में वहां किसानों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा।
एक कृषि विशेषज्ञ के अनुसार जिन इलाकों में 1 से 15 नवम्बर की आदर्श अवधि के दौरान गेहूं की बिजाई की गई वहां भी फसल के लिए समस्या देखी गई क्योंकि उस समय तापमान काफी ऊंचा चल रहा था।
इसे बीज में समय से पहले ही अंकुरण हो गया। इससे उपज दर पर असर पड़ सकता है। अगर फसल की कटाई-तैयारी के दौरान तापमान ऊंचा रहता है तो दाने का वजन घटने की आशंका बढ़ जाएगी।
विशेषज्ञ के मुताबिक आदर्श अवधि के बाद यदि बिजाई में एक सप्ताह की देर होती है तो गेहूं की औसत उपज दर में 2 क्विंटल तक की गिरावट आ जाती है। अब केवल यह देखना है कि कटाई के समय तापमान जरूरत से ज्यादा ऊंचा न हो जाए।
