गेहूं के मोर्चे पर राहत
10-May-2025 10:59 AM
पिछले तीन साल से केन्द्रीय पूल के लिए गेहूं की सरकारी खरीद नियत लक्ष्य से बहुत कम हो रही थी और इसका बफर स्टॉक लगातार घटता जा रहा था।
खुले बाजार में इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न की आपूर्ति एवं उपलब्धता कम होने से कीमतों में तेजी-मजबूती का माहौल बना रहा और सरकार को बाजार में प्रभावी दंग से हस्तक्षेप करने में कठिनाई हुई।
हालांकि वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान सरकार ने खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत फ्लोर मिलर्स एवं प्रोसेसर्स को 84.10 लाख टन गेहूं अपने स्टॉक से उपलब्ध करवाया लेकिन दूसरी ओर प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से राशन कार्ड धारकों को उपलब्ध करवाएं जाने वाले गेहूं के कोटे में कुछ राज्यों के लिए कटौती कर दी गई।
2024-25 के वित्त वर्ष में भी हालत अच्छी नहीं रही और ओएमएसएस के तहत केवल 30 लाख टन गेहूं का स्टॉक उपलब्ध करवाया गया। पिछले साल अप्रैल के आरंभ में केन्द्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक घटकर महज 75 लाख टन के करीब रह गया था जो न्यूनतम आवश्यक मात्रा 74.80 लाख टन से कुछ ही अधिक था।
इसके मुकाबले 1 अप्रैल 2025 को गेहूं का स्टॉक बढ़ कर 118.70 लाख टन पर पहुंच गया क्योंकि ओएमएसएस में कम गेहूं का आवंटन हुआ।
पिछले अनुभवों से सबक लेकर सरकार ने गेहूं की बिक्री की नीति में बदलाव कर दिया। हालांकि गेहूं के खुले बाजार भाव में तेजी को नियंत्रित करने के लिए सरकार को भंडारण सीमा (स्टॉक लिमिट) का सहारा लेना पड़ा इसका कोई व्यापक असर नहीं दिखाई पड़ा क्योंकि व्यापारियों - स्टॉकिस्टों के पास इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न का लम्बा-चौड़ा स्टॉक ही मौजूद नहीं था।
गेहूं का उत्पादन भी सरकारी अनुमान से बहुत कम हुआ था। लेकिन चालू वर्ष के दौरान हालात में बदलाव आने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। इसके तहत शानदार उत्पादन होने से गेहूं की सरकारी एवं व्यापारिक खरीद में अच्छी बढ़ोत्तरी हो रही है।
पिछले रबी मार्केटिंग सीजन की सम्पूर्ण अवधि में केन्द्रीय पूल के लिए कुल 266 लाख टन गेहूं खरीदा गया था जो इस बार बढ़कर 280 लाख टन से ऊपर पहुंच चुका है और सभी प्रमुख उत्पादक राज्यों में खरीद की प्रक्रिया अभी जारी है।
सरकार ने करीब 333 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस बार पंजाब जैसे राज्यों में गेहूं की अच्छी व्यापारिक खरीद हुई है जबकि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश एवं बिहार जैसे प्रांतों में भी खरीद बढ़ने की सूचना मिल रही है।
इससे खुले बाजार में गेहूं की आपूर्ति की स्थिति सुगम रह सकती है और सरकार के पास भी इसका बेहतर स्टॉक उपलब्ध रहेगा।
