गेहूं की सरकारी खरीद की गति धीमी पड़ने लगी
14-May-2025 08:25 PM
नई दिल्ली। केन्द्रीय पूल में गेहूं का सर्वाधिक योगदान देने वाले तीन राज्यों- पंजाब, हरियाणा एवं मध्य प्रदेश में इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न की सरकारी खरीद अंतिम चरण में पहुंच गई है। पंजाब तथा हरियाणा में कल यानी 15 मई तक गेहूं की खरीद होगी।
मध्य प्रदेश में उसके बाद भी खरीद जारी रहेगी जबकि वहां खरीद की मात्रा संशोधित लक्ष्य के करीब पहुंच गई है। प्राप्त सूचना के अनुसार केन्द्रीय पूल के लिए 290 लाख टन से अधिक गेहूं पहले ही खरीदा जा चुका है
जो गत वर्ष से 16 प्रतिशत अधिक है। इसके तहत पंजाब में 124 लाख टन के नियत लक्ष्य की तुलना में 117.10 लाख टन, मध्य प्रदेश में 80 लाख टन के संशोधित लक्ष्य के मुकाबले 77.70 लाख टन, हरियाणा में 75 लाख टन के नियत लक्ष्य के सापेक्ष 70.30 लाख टन,
उत्तर प्रदेश में 30 लाख टन के नियत लक्ष्य की तुलना में 9.62 लाख टन तथा राजस्थान में 20 लाख टन के निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले 14.90 लाख टन गेहूं खरीदा गया।
उपरोक्त पांच प्रांतों के साथ-साथ बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तराखंड एवं हिमाचल प्रदेश सहित अन्य राज्यों में गेहूं फसल की कटाई-तैयारी समाप्त हो चुकी है।
केन्द्रीय खाद्य मंत्रालय ने इस बार राष्ट्रीय स्तर पर 332.70 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है। पंजाब में प्राइवेट व्यापारियों एवं फ्लोर मिलर्स द्वारा 11 लाख टन से अधिक गेहूं की रिकॉर्ड खरीद किए जाने से सरकारी खरीद नियत लक्ष्य से 6-7 लाख टन पीछे रह गई।
हरियाणा में भी लक्ष्य अभी 4 लाख टन आगे है जबकि राजस्थान में 5 लाख टन आगे है। असली समस्या उत्तर प्रदेश में है जहां नियत लक्ष्य के मुकाबले अभी तक केवल एक- तिहाई भाग की सरकारी खरीद संभव हो पाई है।
हालांकि राज्य में गेहूं का संतोषजनक उत्पादन हुआ है मगर ऐसा लगता है कि किसान सरकारी क्रय केन्द्रों पर अपना उत्पाद बेचने के ज्यादा इच्छुक नहीं हैं।
इसके बजाए वे या तो प्राइवेट खरीदारों को गेहूं बेचने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं जो न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊंचे भाव का ऑफर दे रहे हैं या फिर स्टॉक को अपने पास रखना चाहते हैं ताकि भविष्य में भाव बढ़ने पर उसे ऊंचे दाम पर बेच सके।
