गुजरात में अन्य खरीफ फसलों के मुकाबले मूंगफली एवं कपास का रकबा ज्यादा

31-Jul-2025 11:14 AM

अहमदाबाद। देश के पश्चिमी भाग में अवस्थित गुजरात कपास तथा मूंगफली का सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त है। चालू खरीफ सीजन में वहां इन दोनों फसलों का उत्पादन क्षेत्र 20-20 लाख हेक्टेयर से ऊपर  पहुंच चुका है।

गुजरात के कृषि मंत्री का कहना है कि इस बार राज्य के सौराष्ट्र एवं कच्छ संभाग के साथ-साथ उत्तरी भाग में भी मानसून के सही समय पर पहुंचने तथा अच्छी बारिश होने से किसानों को अपनी मनपसंद फसलों का चुनाव करने और उसकी बिजाई में सक्रियता दिखाने का अच्छा अवसर मिल गया।

गुजरात में लगभग 60 लाख हेक्टेयर भूमि में खरीफ फसलों की बिजाई पूरी हो चुकी है जो सामान्य औसत क्षेत्रफल 85 लाख हेक्टेयर का 77 प्रतिशत है। 

मूंगफली की खेती में इस बार किसानों की दिलचस्पी कुछ अधिक देखी जा रही है जिससे इसका उत्पादन क्षेत्र बढ़कर पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल से भी 15 प्रतिशत आगे निकल गया है।

राज्य में 30 जुलाई तक खरीफ कालीन तिलहन फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 24.25 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है जो पिछले साल की तुलना में लगभग एक लाख हेक्टेयर ज्यादा है। 

इसके अलावा वहां इस बार 9.79 लाख हेक्टेयर में धान सहित अनाजी फसलों, 2.52 लाख हेक्टेयर में दलहन फसलों एवं 6.46 लाख हेक्टेयर में चारा फसलों की खेती पूरी हो चुकी है।

कृषि मंत्री के अनुसार देश में कपास और मूंगफली का सर्वाधिक उत्पादन गुजरात में होता है। राज्य में सबसे ज्यादा क्षेत्रफल में कपास की खेती होती है जबकि उसके बाद मूंगफली का रकबा रहता है। वैसे पिछले साल के मुकाबले इस बार कपास के बिजाई क्षेत्र में गिरावट देखी जा रही है। 

गुजरात में धान, ज्वार, अरंडी, तिल एवं सोयाबीन जैसी फसलों की खेती भी बड़े पैमाने पर होती है। उल्लेखनीय है कि अरंडी के उत्पादन में भी गुजरात प्रथम स्थान पर रहता है।

आगामी सप्ताहों के दौरान राज्य में और अधिक बारिश होने की उम्मीद है जिससे खरीफ फसलों की बिजाई का क्षेत्रफल नियमित रूप से सुधर सकता है। गुजरात की 50 प्रतिशत से ज्यादा आबादी अपनी आजीविका के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्र पर ही निर्भर है।