गुजरात में खरीफ फसलों का रकबा गत वर्ष से 4.10 लाख हेक्टेयर पीछे
28-Jul-2025 06:17 PM
गांधीनगर। देश के पश्चिमी प्रान्त- गुजरात में मानसून की अनियमित एवं अनिश्चित बारिश होने तथा वर्षा का वितरण असमान रहने से खरीफ फसलों की बिजाई में बाधा पड़ रही है।
कुछ जिलों में अत्यन्त मूसलाधार बारिश होने से खेतों में पानी जमा हो गया है जबकि कुछ अन्य जिलों में वर्षा का अभाव महसूस किया जा रहा है।
राज्य कृषि विभाग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष 28 जुलाई तक गुजरात में खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 65.56 लाख हेक्टेयर ही पहुंच सका जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 69.66 लाख हेक्टेयर से 4.10 लाख हेक्टेयर कम है।
इसके तहत धान एवं मोटे अनाजों का उत्पादन क्षेत्र 10.76 लाख हेक्टेयर से घटकर 9.80 लाख हेक्टेयर, दलहन फसलों का बिजाई क्षेत्र 3.09 लाख हेक्टेयर से गिरकर 2.53 लाख हेक्टेयर तथा कपास का क्षेत्रफल 23.15 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 20.17 लाख हेक्टेयर रह गया
जबकि तिलहनों का उत्पादन क्षेत्र 22.90 लाख हेक्टेयर से उछलकर 24.26 लाख हेक्टेयर और ज्वार का रकबा 42 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 58 हजार हेक्टेयर पर पहुंच गया। खरीफ फसलों की बिजाई अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है।
धान का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 6.32 लाख हेक्टेयर से गिरकर इस बार 5.77 लाख हेक्टेयर रह गया। इसी तरह दलहन फसलों में अरहर (तुवर) का बिजाई क्षेत्र 1.97 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.55 लाख हेक्टेयर तथा उड़द का बिजाई क्षेत्र 65 हजार हेक्टेयर से गिरकर 51 हजार हेक्टेयर रह गया
जबकि मूंग का क्षेत्रफल 37 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 39 हजार हेक्टेयर पर पहुंच गया बाजार भाव नरम रहने से तुवर की खेती में किसानों की दिलचस्पी घट गई।
लेकिन तिलहन फसलों के तहत खासकर मूंगफली और अरंडी की खेती के प्रति किसानों में बेहतर उत्साह देखा जा रहा है। इसके फलस्वरूप पिछले साल के मुकाबले चालू खरीफ सीजन में मूंगफली का उत्पादन क्षेत्र 18.83 लाख हेक्टेयर से उछलकर 20.11 लाख हेक्टेयर तथा अरंडी का रकबा 78 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 1.30 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया
जबकि सोयाबीन का बिजाई क्षेत्र 2.90 लाख हेक्टेयर से घटकर 2.54 लाख हेक्टेयर और तिल का क्षेत्रफल 36 हजार हेक्टेयर से गिरकर 30 हजार हेक्टेयर रह गया। अरंडी की बिजाई अगस्त में भी जारी रहेगी।
