गुजरात में मसाला फसलों की बिजाई गत वर्ष से पीछे

06-Jan-2026 10:57 AM

गांधीनगर। रबी कालीन मसाला फसलों के एक अग्रणी उत्पादक राज्य- गुजरात के किसान इस बार गेहूं, मक्का, चना एवं सरसों की खेती पर विशेष ध्यान दे रहे हैं जिससे जीरा, धनिया एवं सौंफ जैसे मसालों का स्टॉक घट गया है।

राज्य में मसाला फसलों की बिजाई लगभग समाप्त हो चुकी है इसलिए आगामी समय में क्षेत्रफल का ज्यादा विस्तार संभव नहीं हो पाएगा आमतौर पर गुजरात में मसाला फसलों की बिजाई अक्टूबर से दिसम्बर के बीच होती है। 

व्यापार विश्लेषकों के अनुसार वर्ष 2025 के दौरान घरेलू एवं वैश्विक मांग कमजोर रहने से जीरा, धनिया एवं सौंफ की कीमतों में प्राय: नरमी या स्थिरता का माहौल का बना रहा

और उत्पादकों को उम्मीद के अनुरूप लाभप्रद आमदनी प्राप्त नहीं हो सकी। इसके फलस्वरूप मसाला फसलों की खेती के प्रति किसानों का उत्साह एवं आकर्षक कुछ घट गया। 

राज्य कृषि विभाग के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले सीजन की तुलना में मौजूदा रबी सीजन के दौरान 5 जनवरी 2026 तक गुजरात में जीरा का उत्पादन क्षेत्र 4,73,615 हेक्टेयर से 75,971 हेक्टेयर घटकर 397649 हेक्टेयर,

धनिया का बिजाई क्षेत्र 1,29,343 हेक्टेयर से 4007 हेक्टेयर फिसलकर 1,25,336 हेक्टेयर तथा सौंफ का क्षेत्रफल 58,105 हेक्टेयर से 8063 हेक्टेयर गिरकर 48,042 हेक्टेयर पर सिमट गया। इसी तरह ईसबगोल का रकबा भी गत वर्ष के 27,210 हेक्टेयर से 10,525 हेक्टेयर घटकर इस बार 16,685 हेक्टेयर रह गया। 

गुजरात उपरोक्त मसालों का एक अग्रणी उत्पादक राज्य है इसलिए वहां बिजाई क्षेत्र में आई गिरावट से उत्पादन पर असर पड़ सकता है। वैसे मौसम की हालत  काफी हद तक संतोषजनक बनी हुई है।

फरवरी के अंत में फेडरेशन ऑफ इंडियन स्पाइस स्टैक होल्डर्स  / (एफआईएसएस) का दसवां वार्षिक व्यापार सम्मेलन अहमदाबाद में होने वाला है जिसमें उपरोक्त मसालों के उत्पादन का अनुमान प्रस्तुत किया जाएगा। तब तक इसकी नई फसल की आवक भी शुरू हो चुकी होगी।