गन्ना का रकबा स्थिर रहने पर चीनी का बैलेंस बिगड़ने की संभावना
10-Jun-2026 06:00 PM
नई दिल्ली। इस वर्ष देश में एक शक्तिशाली अल नीनो मौसम चक्र का व्यापक प्रभाव रहने की संभावना है जिससे गन्ना की फसल भी प्रभावित हो सकती है। ऐसे समय में यदि गन्ना का क्षेत्रफल गत सीजन के बराबर या उससे पीछे रहता है तो इससे चीनी के उत्पादन में कमी आ सकती है और इसकी मांग एवं आपूर्ति का संतुलन तलवार की धार पर अटका रह सकता है।
2025-26 के सीजन में चीनी के घरेलू उत्पादन में 2024-25 के मुकाबले करीब 15-16 लाख टन की बढ़ोत्तरी हुई मगर फिर भी सकल उत्पादन इसकी मांग एवं जरूरत से पीछे ही रहा। उद्योग के पास चीनी का लम्बा-चौड़ा बकाया स्टॉक भी नहीं है और न ही अगले सीजन (अक्टूबर 2026-सितम्बर 2027) के लिए ज्यादा अधिशेष स्टॉक बचेगा।
ऐसी हालत में अल नीनो मौसम चक्र, कमजोर मानसून एवं ऊंचे तापमान के कारण गन्ना की औसत उपज दर एवं गन्ना से चीनी की औसत रिकवरी दर में कमी आने पर चीनी का उत्पादन काफी घट सकता है। सरकार ने आगामी खतरे को भांपते हुए चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है जिससे 2025-26 सीजन में इसकी आपूर्ति का संकट टल गया है। लेकिन अगले सीजन के लिए खतरा बना हुआ है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि 5 जून तक देश में गन्ना का कुल रकबा 54.08 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा जो पिछले वर्ष के बराबर ही है। इसका कुल रकबा 58.50 लाख हेक्टेयर तक पहुंचने की उम्मीद है जो पिछले साल के समतुल्य ही है मगर चीनी का स्टॉक बहुत घट जाएगा।
