घरेलू मंडियों में चार महीनों के दौरान 57.50 टन सोयाबीन की आवक
14-Feb-2025 08:34 PM
इंदौर । बेहतर उत्पादन के बावजूद कमजोर भाव के कारण घरेलू मंडियों में इस बार सोयाबीन की आवक की गति धीमी देखी जा रही है।
कीमतों में भारी गिरावट आने से सरकारी एजेंसी को किसानों से रिकॉर्ड मात्रा में सोयाबीन खरीदना पड़ा है जिसकी बिक्री आगामी महीनों की जाएगी। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के आंकड़ों से पता चलता है
कि चालू मार्केटिंग सीजन के शुरूआती चार महीनों में यानी अक्टूबर 2024 से जनवरी 2025 के दौरान मंडियों में कुल 57.50 लाख टन सोयाबीन की आवक हुई जो 2023-24 सीजन की समान अवधि की आवक 62 लाख टन से 4.50 लाख टन कम थी।
इसके तहत अक्टूबर में 18 लाख टन, नवम्बर में 16 लाख टन, दिसम्बर में 12 लाख टन एवं जनवरी में 11.50 लाख टन सोयाबीन की आवक हुई। इन चार महीनों के दौरान देश में सोयाबीन का कोई आयात नहीं हुआ।
सोपा के मुताबिक अक्टूबर 2024 जनवरी 2025 के दौरान देश से 6 हजार टन सोयाबीन का निर्यात हुआ जबकि देश के अंदर 1.80 लाख टन की सीधी खपत 42. लाख टन की क्रशिंग प्रोसेसिंग हुई। इस तरह कुल 44.36 लाख टन सोयाबीन का इस्तेमाल हुआ और 57.40 लाख टन सोयाबीन का स्टॉक किसानों व्यापारियों तथा मिलों के पास बच गया।
इसके अलावा नैफेड तथा एनसीसीएफ जैसी सरकारी एजेंसियों के पास करीब 20 लाख टन सोयाबीन का स्टॉक मौजूद है जिसे 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन में किसानों से 4892 रुपए प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा गया।
सोपा ने 2024-25 के मार्केटिंग सीजन में 125.82 लाख टन सोयाबीन के उत्पादन का अनुमान लगाया है जबकि 8.94 लाख टन के पिछले बकाया स्टॉक तथा 3 लाख टन के संभावित आयात के साथ उसकी कुल उपलब्धता 137.76 लाख टन पर पहुंचने की संभावना व्यक्त की है।
इसमें से 13 लाख टन का स्टॉक अगली बिजाई के लिए सुरक्षित रखा जाएगा और शेष 124.76 लाख टन का स्टॉक क्रशिंग-प्रोसेसिंग एवं प्रत्यक्ष खपत के लिए उपलब्ध रहेगा।
