घरेलू मांग में भारी वृद्धि होने से मक्का के निर्यात में जोरदार गिरावट

28-Mar-2025 11:56 AM

गुरुग्राम। पशु आहार, पॉल्ट्री फीड एवं स्टार्च निर्माण के साथ-साथ एथनॉल उत्पादन के लिए भी मक्का की घरेलू मांग एवं खपत  में भारी बढ़ोत्तरी होने से चालू वर्ष के दौरान भारत से इस महत्वपूर्ण मोटे अनाज के निर्यात में जोरदार गिरावट आई है।

इसके अलावा घरेलू बाजार भाव ऊंचा रहने से भी मक्का का निर्यात प्रभावित हो रहा है। भारतीय मक्का वैश्विक बाजार में गैर प्रतिस्पर्धी हो गया है। 

आई ग्रेन इंडिया के डायरेक्टर एवं अग्रणी बाजार विश्लेषक- राहुल चौहान का कहना है कि यद्यपि देश से मक्का का निर्यात हो रहा है और इस पर किसी तरह की पाबंदी नहीं है लेकिन शिपमेंट की मात्रा अत्यन्त सीमित देखी जा रही है। नवम्बर-दिसम्बर में मक्का का निर्यात प्रदर्शन बेहतर रहा मगर उससे पूर्व इसका शिपमेंट बहुत कमजोर रहा था।

कुल मिलाकर पिछले साल के मुकाबले चालू वर्ष के दौरान मक्का का निर्यात कम होने की संभावना है। राहुल चौहान के अनुसार एक तरफ देश से मक्का के निर्यात में कमी आ रही है तो दूसरी ओर देश में विदेशों से इसका आयात बढ़ रहा है क्योंकि एथनॉल निर्माताओं की मक्का में जबरदस्त मांग बनी हुई है। 

उल्लेखनीय है कि भारत में जीएम मक्का के आयात की अनुमति नहीं दी गई है इसलिए देश में केवल वहीं से इसका आयात हो रहा है जहां गैर जीएम मक्का का उत्पादन होता है।

इसमें यूक्रेन तथा म्यांमार मुख्यत रूप से शामिल हैं जहां से भारत मक्का मंगवाता है। स्वयं भारत में जीएम मक्का का उत्पादन नहीं होता है।

राहुल चौहान के मुताबिक वर्ष 2024 के दौरान भारत में करीब 8.80 लाख टन मक्का का आयात हुआ जिसमें से 4.37 लाख टन का आयात म्यांमार से तथा 4.45 लाख टन का आयात यूक्रेन से किया गया। इसके अलावा सिंगापुर से 1875 टन मक्का मंगवाया गया। 

कंपाउंड लिवस्टॉक फीड मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएलएफएमए) के चेयरमैन के अनुसार भारत से मक्का का निर्यात लगभग पूरी तरह बंद हो गया है क्योंकि इसके उत्पादन में देश आत्मनिर्भर नहीं है।

भारत से मक्का का वास्तविक निर्यात नेपाल तथा दक्षिण- पूर्व एशिया के देशों को हो रहा था मगर अब वहां मुश्किल से इसकी कोई खेप पहुंच रही है।

भारत में मक्का का जो भी उत्पादन होता है उसकी पूरी खपत घरेलू प्रभाग में ही हो जाती है और निर्यात के लिए स्टॉक नहीं रहता है।