हाइब्रिड धान का भंडारण करने में पंजाब के राइस मिलर्स की दिलचस्पी बढ़ी
17-Oct-2025 02:00 PM
चंडीगढ़। इस वर्ष पंजाब के राइस मिलर्स की सरकारी धान की खरीद नीति में आश्चर्यजनक बदलाव देखा जा रहा है। राइस मिलर्स पिछले साल सरकार से जिस हाइब्रिड धान को लेने से मनाकर कर रहे थे और राज्य सरकार ने भी इस पर प्रतिबंध लगा दिया था उस धान को वे इस बार सहर्ष स्वीकार कर रहे हैं
और सरकार द्वारा दिए जा रहे स्टॉक का भंडारण भी कर रहे हैं राइस शेलर्स पिछले साल तक यह कह रहे थे कि हाइब्रिड धान की मिलिंग से चावल का कम उत्पादन मिलता है और इसमें टूट का अंश भी ज्यादा रहता है। चालू वर्ष के आरंभ में इस धान के उपयोग पर कानूनी लड़ाई भी हुई थी।
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) किसानों से धान खरीदकर उसे कस्टम मिलिंग के लिए राइस मिलर्स को आवंटित करता है और बदले में 67 प्रतिशत चावल प्राप्त करता है।
गत वर्ष मिलर्स ने कहा था कि हाइब्रिड धान से इतना चावल प्राप्त नहीं होता है। इस धान से 60-63 प्रतिशत चावल ही हासिल होता है और इसलिए निगम के नियम से उसे आर्थिक नुकसान होता है।
इसे देखते हुए पंजाब सरकार ने 2025 के खरीफ सीजन में रोपाई से पूर्व गैर बासमती हाइब्रिड धान के बीज की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था। बाद में यह मामला अदालत में पहुंच गया लेकिन जब तक वहां से कोई फैसला आता तब तक राज्यों में धान की खेती की प्रक्रिया समाप्त हो चुकी थी।
हाइब्रिड बीज की बिक्री पर प्रतिबंध लागू होने के बावजूद पंजाब के किसानों ने हरियाणा तथा हिमाचल प्रदेश से इसे मंगाया और इसकी खेती की। अदालत का निर्णय आने से पूर्व ही पंजाब के कई भागों में हाइब्रिड धान की रोपाई हो गई।
पंजाब में प्रतिकूल मौसम एवं प्राकृतिक आपदाओं के कारण धान की औसत उपज दर 28.30 क्विंटल प्रति एकड़ की सामान्य स्तर से घटकर इस बार 22-23 क्विंटल प्रति एकड़ पर सिमट जाने की संभावना है
जिससे राइस शेलर्स को लगता है कि इस बार मिलिंग के लिए उसे धान का पर्याप्त स्टॉक नहीं मिल पाएगा। वे उस कमी का हाइब्रिड धान से पूरा करना चाहते है ताकि मिलों को अधिक से अधिक समय तक गतिशील रख सकें।
