जीएम फसलों के लिए सख्ती
04-Jan-2025 12:06 PM
भारत में जीएम फसलों पर आरंभ से ही विवाद बरकरार है और इससे सम्बन्धित मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
अक्सर यह शिकायत भी सामने आती रही है कि जीएम फसलों के व्यावसायिक उत्पादन की अनुमति देने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होती है और इसमें कई तरह के संदेह रहते हैं।
सरकार ने इस मामले को अब गंभीरता से लिया है। 31 दिसम्बर 2024 को इस सम्बन्ध में एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की गई। उसमें सरकार ने नियमों में संशोधन-परिवर्तन करने का प्रस्ताव रखा है जिसका उद्देश्य जीएम ऑर्गेनिज्म फसलों तथा उत्पादों के अनुमोदन एवं विनियमन के लिए जिम्मेदार संस्था- जेनेटिक इंजीनियरिंग एप्रैजल कमिटी (जीएक) की नीति निर्माण प्रक्रिया में अधिक से अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
अधिसूचना में स्पष्ट कहा गया है कि जीएक के सदस्यों को इसका खुलासा करना आवश्यक होगा कि उसका अपना कोई व्यक्तिगत या व्यावसायिक हित उसमें निहित है या नहीं जो उसके फैसले को प्रभावित कर सकता है।
देश में फिलहाल केवल बीटी कॉटन के रूप में एक मात्र जीएम फसल की खेती की अनुमति है जिसे मुख्यत: एक अखाद्य या औद्योगिक फसल माना जाता है।
खाद्य श्रेणी की किसी फसल की व्यावसयिक खेती की स्वीकृत नहीं दी गई है। सरसों की जीएम किस्म का विकास तो हो चुका है लेकिन इसे मंजूरी देने का मामला अटका हुआ है।
इसी तरह बैगन सहित कुछ अन्य फसलों की जीएम प्रजाति भी स्वीकृति के लिए लाइन में खड़ी हैं। जीएक के सदस्यों को जिस जीएम फसल के बारे में निर्णय लेना है उससे सम्बन्धित मामलों में किसी भी परिचर्चा एवं सार्वजनिक बातचीत में भाग लेने से बचना होगा।
प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल सदस्य कहीं भी कोई सार्वजनिक बयान नहीं दे सकेंगे। जो सदस्य समिति में शामिल होंगे उन्हें पहले ही लिखित रूप में इसकी घोषणा करनी पड़ेगी कि जिस जीएम फसल के बारे में निर्णय लिया जाएगा
उसमें उनका किसी तरह का कोई स्वार्थ नहीं होगा। इन उपायों के लागू होने से जीएम फसलों को अनुमति देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने के आसार हैं।
