कनाडा की पीली मटर के कारोबार का रास्ता है चुनौतीपूर्ण
03-Dec-2024 05:20 PM
वैंकुवर । कनाडा में कई अन्य फसलों की भांति मटर का उत्पादन भी मुख्य: निर्यात बाजार पर आश्रित है। वहां मटर एवं मसूर का उत्पादन घरेलू मांग एवं खपत से बहुत अधिक होता है और इसलिए निर्यात के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहता है। उसके वार्षिक उत्पादन के लगभग 90 प्रतिशत भाग का विदेशों में निर्यात किया जाता है। लेकिन निर्यात के लिए आगे का रास्ता काफी चुनौतीपूर्ण प्रतीत हो रहा है।
दरअसल कनाडाई दलहनों का निर्यात पिछले एक दशक के दौरान भारत और चीन पर काफी हद तक निर्भर रहा है लेकिन इन दोनों देशों के साथ कनाडा के सम्बन्ध बिगड़ते जा रहे हैं।
मटर के लिए सबसे बड़ा मुद्दा भारत के साथ है जहां पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा 31 दिसम्बर को समाप्त हो रही है। यदि इसकी अवधि आगे नहीं बढ़ाई जाती है तो इसका कनाडाई मटर बाजार पर गहरा प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
दरअसल एक प्रमुख खरीदार चीन भी अब रूस से मटर का आयात तेजी से बढ़ा रहा है। कुछ वर्ष पूर्व तक चीन के 90 प्रतिशत से अधिक मटर बाजार पर कनाडा का कब्जा था अब घटकर 50 प्रतिशत से भी नीचे आ गया है। ऐसी हालत में यदि भारत का विशाल बाजार बंद हुआ तो कनाडाई उत्पादकों एवं निर्यातकों को गहरा धक्का लग्ना निश्चित है।
भारत पर कनाडा की गहरी नजर केन्द्रित है क्योंकि यदि पीली मटर पर दोबारा सीमा शुल्क एवं कठोर नियम लागू किया गया तो चीन पर कनाडाई मटर के निर्यातकों की निर्भरता बहुत बढ़ जाएगी जबकि चीन के आयातक कनाडा के बजाए रूस से मटर की खरीद को प्राथमिकता दे रहे हैं।
भारत ने जब वर्ष 2017 में पहली बार मटर पर आयात शुल्क लगाया था तब चाइनीज बाजार में कठिन प्रतिस्पर्धा नहीं होने के कारण कनाडा को राहत मिल गई थी मगर अब हालात काफी हद तक बदल गए हैं।
