कनाडा में विभिन्न कारणों से दलहनों का उत्पादन बेहतर होने के आसार

11-Aug-2025 03:58 PM

सस्काटून। कनाडा में बिजाई क्षेत्र बढ़ने, मौसम तथा बारिश की हालत अनुकूल होने तथा औसत उपज दर में सुधार आने की उम्मीद को देखते हुए एक अग्रणी विश्लेषक दीपक रावत ने दलहनों का उत्पादन बेहतर होने का अनुमान लगाया है।

दलहन फसलों की जोरदार कटाई-तैयारी अगले कुछ सप्ताहों में शुरू होने वाली है और तभी वास्तविक पैदावार, क्वालिटी तथा उपज दर का पता चल सकेगा। 

लाल मसूर के बारे में दीपक रावत का कहना है कि सरकारी एजेंसी- स्टैट्स कैन ने इसके बिजाई क्षेत्र में 16 प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान लगाया है जबकि इसका उत्पादन 2024 के मुकाबले करीब 19 प्रतिशत घटकर 14.00-14.50 लाख टन पर सिमटने की संभावना व्यक्त की है।

लगभग 5 लाख टन के पिछले बकाया स्टॉक के साथ इसकी कुल उपलब्धता 19.50 लाख टन के करीब पहुंच सकती है जो गत वर्ष के लगभग बराबर ही होगी।

इसका कुल निर्यात 20 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है जिसका मतलब यह है कि 2026 के सीजन में लाल मसूर का मामूली या नगण्य स्टॉक बच सकता है। 

उधर तुर्की में लाल मसूर का उत्पादन घरेलू मांग से करीब 2 लाख टन कम होने की आशंका है जबकि रूस में भी उत्पादन घटकर 1.50-2.00 लाख टन पर सिमटने की संभावना है।

लेकिन ऑस्ट्रेलिया में लाल मसूर का उत्पादन बढ़कर 16.00-16.50 लाख टन पर पहुंचने के आसार हैं। कजाकिस्तान की मसूर का अधिकांश भाग तुर्की एवं भूमध्य सागरीय क्षेत्र के देशों द्वारा किया जाएगा। 

कनाडा की लाल मसूर का दाम निकट भविष्य में सीमित दायरे में घूमता रह सकता है मगर इसमें सीमित गिरावट आने की संभावना है। अधिकांश निर्यात शिपमेंट बल्क जहाजों में हो सकता है क्योंकि कंटेनरों का किराया भाड़ा फिलहाल गैर प्रतिस्पर्धी बना हुआ है।

यदि इसका औसत मूल्य 600 डॉलर प्रति टन के आसपास रहा तो उत्पादकों एवं बल्क निर्यातकों की सक्रियता बढ़ सकती है। 

जहां तक हरी मसूर का सवाल है तो इसके बिजाई क्षेत्र में भारी बढ़ोत्तरी हुई है और इसका उत्पादन पिछले साल की तुलना में करीब 60 प्रतिशत उछलकर इस बार 11.50-12.00 लाख टन के शीर्ष स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान है।

इसमें लेपर्ड किस्म का योगदान 5.50 लाख टन तक हो सकता है जबकि शेष भागीदारी अन्य किस्मों की होगी। हरी मसूर का पिछला बकाया स्टॉक कम है फिर भी 2025-26 के सीजन में इसकी कुल उपलब्धता बढ़कर 13 लाख टन के करीब पहुंच सकती है जो 2013-14 सीजन के बाद सबसे ज्यादा होगी। रूस में उत्पादन 2.00-2.50 लाख टन पर सिमटने की संभावना है।