कारोबार में सरलता के लिए सरकार में 'प्रूफ ऑफ ओरीजीन' को परिभाषित किया

23-Apr-2025 01:08 PM

नई दिल्ली। कारोबार में सुगमता लाने तथा व्यापार समझौतों के दुरूपयोग की संभावना को समाप्त करने के उद्देश्य से केन्द्र सरकार ने आयात- निर्यात के लिए लागू 'मूल उद्गम प्रमाण' (प्रूफ ऑफ ओरीजीन) को स्पष्ट रूप से परिभाषित कर दिया है। पहले उद्गम प्रमाण पत्र दिखाने से काम चल जाता था लेकिन अब उसका सबूत प्रस्तुत करना आवश्यक हो गया है।

सीमा शुल्क में छूट प्राप्त करने के इच्छुक आयातकों को मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) वाले देशों से मंगाए जाने वाले उत्पादों के लिए उद्गम स्रोत का सबूत या 'सर्टिफिकेट ऑफ ओरीजीन' प्रस्तुत करना आवश्यक होता है जिससे यह प्रमाणित हो सके कि जिस देश से किसी उत्पाद या उत्पादों का आयात किया गया है उसका उत्पादन उसी देश में हुआ है। 

केन्द्रीय वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग द्वारा जारी एक सर्कुलर के अनुसार प्रूफ ऑफ ओरीजीन का मतलब है कि आयातक के पास कोई ऐसा प्रमाण पत्र या डिक्लेरेशन मौजूद हो जिसे किसी व्यापार संधि के नियमों-प्रावधानों के अनुरूप जारी किया गया हो और जिससे यह साबित होता हो कि वह उत्पाद (सामान) उस आपूर्तिकर्ता देश की उद्गम शर्तों को पूरा करता है। 

सर्टिफिकेट ऑफ ओरीजीन (सीओओ) उन भारतीय निर्यातकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण और आवश्यक दस्तावेज है जो उन देशों को उत्पादों का निर्यात करते हैं जिसके साथ भारत के व्यापार समझौते हो चुके हैं।

निर्यातकों को आयातक देशों के चिन्हित बंदरगाहों पर यह सर्टिफिकेट जमा करना आवश्यक होता है। मुक्त व्यापार संधि के तहत सीमा शुल्क से छूट राहत प्राप्त करने हेतु दावा करने वाले निर्यातकों के लिए यह सर्टिफकेट अनिर्वाय माना जाता है।