किसान क्रेडिट कार्ड के तहत खराब ऋण में 42 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी

11-Mar-2025 08:31 PM

मुम्बई। किसान क्रेडिट कार्ड के अकाउंट में पिछले चार वर्षों के अंदर खराब या डूबे हुए ऋण (बैंक लोन) में 42 प्रतिशत का भारी इजाफा हो गया है जो कृषि क्षेत्र में संकुचन का संकेत है।

यह इजाफा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर अन्य सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के लिए हुआ है। बैड लोन वह कर्ज है जिसकी वसूली मुश्किल होती है।

किसानों को इस कार्ड के तहत नकद ऋण की सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है। इस संवर्ग में निष्क्रिय या खराब ऋण की बकाया राशि दिसम्बर 2024 तक आते-आते उछलकर 97,543 करोड़ रुपए पर पहुंच गई जो मार्च 2021 के अंत में 68,547 करोड़ रुपए रही थी।

सूचना के अधिकार के तहत पूछे गए सवाल के जवाब में भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से यह आंकड़ा दिया गया है। 

दरअसल राष्ट्रीय स्तर पर किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत कृषक समुदाय को खेती-बाड़ी में सहायता के लिए बैंको एवं वित्तीय संस्थानों द्वारा ऋण प्रदान किया जाता है मगर अक्सर किसान इस कर्ज को चुकाने में विफल हो जाते हैं।

कभी फसल खराब हो जाती है तो कभी बाजार भाव घटकर काफी नीचे आ जाता है। इसके अलावा किसानों को कई अन्य समस्याओं-चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है।

कृषि साधनों पर खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है और आर्थिक तंगी के कारण अधिकांश किसान खेती के आधुनिक मशीन- उपकरण तथा तौर-तरीकों का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं जिससे उन्हें फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में अपेक्षित सफलता नहीं मिलती है। 

सरकार कृषि ऋण को जारी रखना चाहती है ताकि किसानों को विभिन्न फसलों की खेती में सहूलियत हो सके। लेकिन जब बाढ़, वर्षा, सूखा या ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं अथवा कीड़ों-रोगों से फसलों को भारी नुकसान होता है और बीमा कंपनियों द्वारा भुगतान में देरी की जाती है तब किसानों को ऋण चुकाना कठिन हो जाता है।