कश्मीर घाटी के लिए बेहतरीन सुगंधित धान की किस्म का विकास
09-Sep-2026 08:01 PM
श्रीनगर। माउंटेन रिसर्च सेंटर फॉर फील्ड क्रॉप्स, खुड़वानी द्वारा कश्मीर घाटी में खेतों के लिए बेहतरीन दाने वाले सुगंधित धान की एक नई किस्म का विकास किया है जिससे किसानों को ऊंचे दाम वाले धान के उत्पादन का एक अच्छा विकल्प मिल सकता है।
यह अनुसंधान केन्द्र शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के अधीन काम करता है। वर्ष 2021 में ही रिसर्च सेंटर ने धान की इस नई किस्म के विकास के लिए प्रयास आरंभ कर दिया था और ट्रायल या परीक्षण की एक श्रृंखला चलाने के बाद वर्ष 2024 में कश्मीर घाटी के किसानों को इसके प्रमाणित बीज का वितरण आरंभ किया गया। इससे वहां किसानों को उसकी व्यावसायिक खेती शुरू करने में सहायता मिल रही है।
उल्लेखनीय है कि धान की यह नई किस्म अपने रूप-रंग एवं गुण में बासमती के लगभग समतुल्य है लेकिन चूंकि इसे बासमती के परम्परागत उत्पादक क्षेत्रों से बाहर के इलाकों में खेती के लिए विकसित किया गया है इसलिए तत्काल इसे बासमती की श्रेणी में रखना मुश्किल है।
ध्यान देने की बात है कि भारत में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ कश्मीर के दो जिलों में उत्पादित लम्बे दाने वाले खुशबूदार चावल को ही बासमती के रूप में मान्यता प्राप्त है।
कश्मीर में धान की जो नई किस्म विकसित हुई है उसकी खेती बासमती के लिए चिन्हांकित दोनों जिलों से बाहर अन्य जिलों में हो रही है इसलिए उसे बासमती चावल नहीं माना जा रहा है लेकिन इसका दाम सामान्य श्रेणी के गैर बासमती चावल से ऊंचा रहता है।
