कश्मीर में बारिश से केसर उत्पादकों की चिंता हुई दूर

23-Dec-2025 12:04 PM

पम्पोर। अक्टूबर एवं नवम्बर माह के दौरान बारिश का अभाव रहने से कश्मीर के पम्पोर क्षेत्र में केसर उत्पादकों की चिंता काफी बढ़ गई वहां अच्छी वर्षा होने से उत्पादकों ने राहत की सांस ली है।

उत्पादकों का कहना है कि देर से ही सही, मगर बारिश तो हुई। दूसरे सूखे का संकट काफी हद तक दूर हो जाएगा। कश्मीर के कई इलाकों में बर्फबारी भी शुरू हो गई है और तापमान घट कर काफी नीचे आ गया है। 

समीक्षकों के अनुसार केसर की फसल को अक्टूबर-नवम्बर में अपनी प्रगति के चरण में नमी की सर्वाधिक जरूरत पड़ती है और किसान को इस अवधि में अच्छी वर्षा होने की उम्मीद रहती है।

लेकिन इस बार इन दोनों महीनों में वर्षा नहीं या नगण्य होने से खेतों की मिटटी सूखने लगी थी। इससे उत्पादक काफी चिंतित और परेशान हो गए थे।

अगली पैदावार के लिए इन महीनों का मौसम अनुकूल होना आवश्यक माना जाता है। सूखे की स्थिति रहने पर फसल का पूरी तरह विकास नहीं हो पाता है। 

पिछले दिन कश्मीर के अधिकांश इलाकों में अच्छी बारिश तथा ऊंचे क्षेत्रों में बर्फबारी हुई जिससे केसर की फसल को काफी राहत मिली। कश्मीर घाटी में करीब 16,000 परिवार केसर की खेती पर आश्रित हैं और वहां इसका औसत उत्पादन 2.60 से 3.40 टन (2600 से 3400 किलो) के बीच होता है।

विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि अनियमित बारिश एवं लम्बे समय तक सूखे की स्थिति के कारण केसर की पैदावार एवं क्वालिटी पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

उल्लेखनीय है कि केसर की गिनती सबसे महंगे मसालों में होती है और भारत में इसका उत्पादन मुख्यतः कश्मीर के कुछ भागों में ही होता है। 

हालांकि स्थानीय प्रशासन केसर की फसल पर नियमित रूप से गहरी नजर रख रहे हैं लेकिन उसका कहना है कि उत्पादकों को भी सजग-सतर्क रहना होगा। हाल की बारिश से फसल को फायदा हुआ है और इसके उत्पादन में गिरावट की आशंका काफी घट गया है।