कृषि उत्पादों के तिमाही औसत निर्यात में 30 प्रतिशत का इजाफा

09-May-2025 08:32 PM

नई दिल्ली। पिछले कुछ महीनों से भारतीय कृषि उत्पादों के निर्यात में अच्छी बढ़ोत्तरी हो रही है। एसबीआई म्युचुअल फंड्स की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि मात्रा की दृष्टि से तिमाही मूविंग औसत आधार पर कृषि उत्पादों के निर्यात में 30 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है।

इस रिपोर्ट में अप्रैल 2019 से ही कृषि उत्पादों के निर्यात में वार्षिक वृद्धि दर का आंकलन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ महीनों के दौरान कृषि उत्पादों की निर्यात मात्रा में जोरदार बढ़ोत्तरी हुई है। 

रिपोर्ट के अनुसार निर्यात मात्रा में जनवरी 2025 के दौरान 39 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि हुई थी जबकि फरवरी में भी इसमें 15 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया।

यह बढ़ोत्तरी इस दृष्टिकोण से उल्लेखनीय रही कि वर्ष 2022 के मध्य से लेकर वर्ष 2024 के आरंभ तक के बीच अधिकांश अवधि की तुलना में यह वृद्धि काफी अधिक रही। उस समय निर्यात में वृद्धि या तो ऋणात्मक या एक अंक में चल रही थी।

इससे पूर्व जब कोरोना महामारी का पीक समय जारी था तब खासकर वर्ष 2020 के मध्य से 2021 के आरंभ तक कृषि उत्पादों के निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी हुई थी।

उदाहरणस्वरूप सितम्बर 2019 के मुकाबले दिसम्बर 2020 के दौरान निर्यात की मात्रा में 100 प्रतिशत से भी ज्यादा की बढ़ोत्तरी हो गई जिससे वैश्विक संकट के दौरान भारतीय कृषि उत्पादों की मजबूत मांग का स्पष्ट संकेत मिल रहा था। 

दिसम्बर 2023 के बाद से इसमें नियमित रूप से बढ़ोत्तरी का रुख बना हुआ है और इसकी वृद्धि दर ऋणात्मक जोन से बाहर निकलकर घनात्मक सीमा में आ गई।

नवीनतम आंकड़ों से ज्ञात होता है कि कृषि क्षेत्र की अच्छी रिकवरी हो रही है और निर्यात की रफ्तार बढ़ रही है। कृषि उत्पादों के निर्यात की गतिविधियों में ऐसे समय में भारी तेजी देखी जा रही है जब देश में खाद्यान्न का उत्पादन उछलकर नए-नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहा है।

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने अपने दूसरे अग्रिम अनुमान में 2024-25 के रबी सीजन में 1154.30 लाख टन गेहूं के साथ खाद्यान्न का सकल उत्पादन बढ़कर 1645 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाने की संभावना व्यक्त की है।

जो 2023-24 के रबी उत्पादन 1550 लाख टन से 6 प्रतिशत अधिक है। इसके तहत चावल तथा मोटे अनाजों के उत्पादन में भी भारी बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद व्यक्त की गई। भारत लम्बे समय से दुनिया में चावल का सबसे प्रमुख निर्यातक देश बना हुआ है।