क्या भारत दालों के मामले में भी आयात-निर्भर देश बनता जा रहा है?
05-Jul-2025 12:19 PM
क्या भारत दालों के मामले में भी आयात-निर्भर देश बनता जा रहा है?
★ 5 साल में आयात 8% से बढ़कर 27% हुआ, क्या तेल जैसी गलती फिर दोहराएंगे?
★ सरकारी उत्पादन और आयात आंकड़ों का अध्धयन करें तो 2020-21 में जहां दलहनों का कुल आयात घरेलू उत्पादन का सिर्फ 8% था, वहीं 2024-25 में यह आंकड़ा बढ़कर 27% तक पहुंच गया है। यानी महज पांच वर्षों में आयात का अनुपात तीन गुना से भी अधिक हो गया है।
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क्या दालों में भी तेल जैसी कहानी दोहराई जा रही है?
★ यह स्थिति बहुत हद तक खाद्य तेलों की उस कहानी जैसी लग रही है, जो 1990 के बाद शुरू हुई थी।
★ 1990 से पहले भारत अपनी आवश्यकता का लगभग 70% खाद्य तेल स्वयं उत्पादित करता था, लेकिन 1990 में जब खाद्य तेल को OGL के तहत खोला गया तब से आयात 65% तक पहुंचा। अब भारत खाद्य तेलों का सबसे बड़ा आयातक बन चुका है।
★ अब यही खतरा दालों के साथ भी मंडरा रहा है।
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किसानों को नहीं मिल रहा उचित मूल्य
★ आयात बढ़ने से घरेलू बाजार में दालों की कीमतें दबाव में हैं, जिससे किसान दालों की खेती छोड़कर दूसरी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। इसका नतीजा यह है कि देश में दाल उत्पादन लगातार अस्थिर होता जा रहा है।
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पूरी चेन पर असर
★ अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि उपभोक्ताओं को सस्ती दालें उपलब्ध कराना प्राथमिकता है, लेकिन यह भूल जाती है कि किसान, प्रोसेसर, व्यापारी और होलसेलर भी उसी चेन का हिस्सा हैं और वे भी उपभोक्ता हैं। जब किसी एक कड़ी को तोड़ा जाता है, तो पूरी आपूर्ति श्रृंखला असंतुलित हो जाती है।
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क्या आत्मनिर्भरता केवल नारा बनकर रह जाएगी?
★ जब तक किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलेगा, और जब तक नीतियों में संतुलन नहीं होगा, तब तक दालों में आत्मनिर्भरता केवल एक अच्छा सुनाई देने वाला सपना ही रहेगा।
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★ आज जो स्थिति दालों के साथ बन रही है, वह भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी है।
★ यदि समय रहते सरकार ने उत्पादन बढ़ाने, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सुनिश्चित करने और घरेलू प्रोसेसिंग को प्रोत्साहन देने जैसे उपाय नहीं किए, तो जल्द ही भारत दालों में भी खाद्य तेल जैसा भारी आयातक देश बन जाएगा—जहाँ कीमतें और नीति दोनों विदेश से तय होंगी।
★ क्या भारत यह गलती दोहराने के लिए तैयार है? या हम सबक लेकर आत्मनिर्भरता की ओर लौटेंगे? का जवाब आयातित आंकड़े दे रहे हैं।
