खरीफ कालीन चावल की सरकारी खरीद बढ़कर 313 लाख टन से ऊपर पहुंची
03-Jan-2025 05:39 PM
नई दिल्ली । आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि वर्तमान खरीफ मार्केटिंग सीजन की पहली तिमाही में यानी अक्टूबर दिसम्बर 2024 के दौरान सरकार द्वारा कुल 313.13 लाख टन चावल (इसके समतुल्य धान) की खरीद की गई जो वर्ष 2023 की समान अवधि की खरीद 300.15 लाख टन से करीब 13 लाख टन या 4.3 प्रतिशत ज्यादा तथा कुल नियत खरीद लक्ष्य 492.11 लाख टन का लगभग 64 प्रतिशत है।
हालांकि पंजाब, हरियाणा तक अन्य उत्तरी राज्यों में खरीद की प्रक्रिया दिसम्बर में समाप्त हो गई मगर उत्तर प्रदेश सहित अन्य प्रांतों में यह फरवरी के अंत तक जारी रहने की संभावना है।
पिछले सीजन के मुकाबले चालू खरीफ मार्केटिंग सीजन के दौरान चावल की सरकारी खरीद 124.35 लाख टन से 6.5 प्रतिशत घटकर 116.30 लाख टन तथा हरियाणा में 39.49 लाख टन से गिरकर 35.99 लाख टन पर सिमट गई। इस बार पंजाब में 124 लाख टन और हरियाणा में 40 लाख टन चावल की खरीद का लक्ष्य नियत किया गया था।
उद्योग-व्यापार समीक्षकों के अनुसार पहली तिमाही में ही आमतौर पर खरीद के रुख का पता चल जाता है। पंजाब-हरियाणा में खरीद घटी है लेकिन अन्य अधिकांश प्रमुख उत्पादक राज्यों में धान-चावल की सरकारी खरीद में बढ़ोत्तरी होने के संकेत मिल रहे हैं।
यदि मौजूदा माहौल बरकरार रहा तो खरीफ मार्केटिंग सीजन में चावल की कुल खरीद 500 लाख टन के आसपास पहुंच सकती है।
नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में चावल की खरीद उछलकर 52.84 लाख टन पर पहुंच गई है जो पिछले सीजन की खरीद 38.59 लाख टन से 37 प्रतिशत ज्यादा है।
यह आंकड़ा 31 दिसम्बर तक का है। वहां किसानों को धान की खरीद पर अतिरिक्त बोनस भी दिया जाता है। तेलंगाना में भी चावल की खरीद 27.11 लाख टन से 4 प्रतिशत सुधरकर 28.25 लाख टन,
उत्तर प्रदेश में 22.65 लाख टन से 5.5 प्रतिशत सुधरकर 23.88 लाख टन, मध्य प्रदेश में 11.60 लाख टन से 43.5 प्रतिशत उछलकर 16.65 लाख टन तथा महाराष्ट्र में 3.49 लाख टन से 6 प्रतिशत बढ़कर 3.69 लाख टन पर पहुंच चुकी है।
आंध्र प्रदेश में भारी वर्षा एवं बाढ़ तथा चक्रवाती तूफान से धान की फसल को हुए नुकसान के बावजूद चावल की सरकारी खरीद गत वर्ष के 6.21 लाख टन से 77 प्रतिशत उछलकर इस बार 10.98 लाख टन पर तथा बिहार में 4.15 लाख टन से 63.7 प्रतिशत बढ़कर 6.79 लाख टन पर पहुंच गई।
लेकिन उड़ीसा में चावल की खरीद 8.93 लाख टन से 12 प्रतिशत घटकर 7.87 लाख टन पर सिमट गई। वहां आगे इसमें वृद्धि हो सकती है।
