खरीफ कालीन उड़द का उत्पादन एक दशक के निचले स्तर पर सिमटने का अनुमान
14-Nov-2024 05:13 PM
नई दिल्ली । एक अग्रणी एग्री मार्केट रिसर्च फर्म- आई ग्रेन इंडिया के डायरेक्टर राहुल चौहान ने कहा है कि केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने खरीफ 2024 के दौरान उड़द का घरेलू उत्पादन घटकर 12.10 लाख टन पर सिमटने का अनुमान लगाया है जो पिछले एक दशक में सबसे कम है।
इससे पूर्व का उत्पादन खरीफ 2015 के 12.50 लाख टन से लेकर 2017 के 27.50 लाख टन के बीच होता रहा है। उनका कहना है कि उड़द के उत्पादन में भारी गिरावट आने का प्रमुख कारण इसका बिजाई क्षेत्र घट जाना है।
राहुल चौहान के मुताबिक इस वर्ष खरीफ सीजन के दौरान महाराष्ट्र एवं कर्नाटक जैसे महत्वपूर्ण उत्पादक राज्यों में उड़द के अनेक परम्परागत उत्पादक इसकी खेती को छोड़कर या इसका क्षेत्रफल घटाकर अन्य फसलों की तरफ आकर्षित हो गए जिसमें अरहर (तुवर) मुख्य रूप से शामिल है।
यद्यपि उड़द का बाजार भाव भी सरकारी समर्थन मूल्य से ऊंचा चल रहा था मगर किसानों को इसकी तुलना में तुवर से ज्यादा आकर्षक आमदनी प्राप्त हो रही थी।
घरेलू उत्पादन में आने वाली गिरावट की भरपाई के लिए भारत नियमित रूप से विदेशों और खासकर म्यांमार से भारी मात्रा में उड़द का आयात कर रहा है।
राहुल चौहान के मुताबिक सरकार ने मार्च 2025 तक उड़द के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दे रखी है। चालू वित्त वर्ष के शुरूआती सात महीनों में यानी अप्रैल-अक्टूबर 2024 के दौरान देश में उड़द का आयात तेजी से बढ़कर 4.60 लाख टन के करीब पहुंच गया जो पिछले साल की समान अवधि के आयात 3.21 लाख टन से काफी अधिक है।
भारी-भरकम आयात के कारण घरेलू प्रभाग में उड़द की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति काफी हद तक सुगम बनी रही और कीमतों में भी स्थिरता देखी जा रही है।
लेकिन आयात में हुई लगभग 43 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोत्तरी से स्पष्ट संकेत मिलता है कि उड़द के आयात पर भारत की निर्भरता बढ़ती जा रही है। इस बार घरेलू उत्पादन में जोरदार गिरावट आने से इसका आयात और भी बढ़ने की संभावना है। घरेलू प्रभाग में उड़द के दाम में कुछ तेजी का माहौल देखा जा रहा है।
11 नवम्बर 2024 को उड़द का भाव मुम्बई में सामान्य औसत क्वालिटी (एफएक्यू) वाले माल का 8650 रुपए प्रति क्विंटल तथा चेन्नई में 8450 रुपए प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। चेन्नई में स्पेशल क्वालिटी (एसक्यू) वाले माल का मूल्य 9200 रुपए प्रति क्विंटल रहा। इससे घरेलू प्रभाग में उड़द की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति जटिल रहने का संकेत मिलता है।
म्यांमार में एफएक्यू श्रेणी की उड़द का भाव 4 नवम्बर को 1005 डॉलर प्रति टन था जो 11 नवम्बर को गिरकर 975 डॉलर प्रति टन रह गया।
राहुल चौहान के मुताबिक फिलहाल म्यांमार में उड़द के उत्पादन की स्थिति अनिश्चित बनी हुई है मगर वहां बिजाई कुछ बढ़ने की संभावना है। भारत में उत्पादन घटने से आयात बढ़ने के आसार हैं जिससे आगामी महीनों में कीमतें कुछ तेज हो सकती हैं।
