खाद्य सब्सिडी को नियंत्रित करने के उपायों पर मंधन

16-Jan-2026 01:27 PM

नई दिल्ली। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर विभिन्न कृषि उत्पादों की विशाल खरीद तथा मुफ्त राशन वितरण योजना सहित अन्य मदों के लिए खाद्य सब्सिडी का दायरा लगातार तेजी से बढ़ता जा रहा है जिससे राजकोष या सरकारी खजाने पर भारी दबाव पड़ रहा है।

केन्द्र सरकार अब खाद्य सब्सिडी का नियंत्रित करने के लिए विभिन्न उपायों एवं तौर तरीकों पर गम्भीरतापूर्वक विचार कर रही है। विश्लेषकों के अनुसार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के माध्यम से देश के 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को मुफ्त में राशन वितरण की स्कीम को स्वयं प्रधानमंत्री ने वर्ष 2029 तक जारी रखने की घोषणा की थी

इसलिए उसमें किसी तरह का बदलाव होना मुश्किल है। इसी तरह किसानों से एमएसपी पर धान तथा गेहूं की खरीद भी जारी रखी जाएगी क्योंकि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केन्द्रीय पूल में खाद्यान्न (चावल एवं गेहूं) का पर्याप्त स्टॉक होना आवश्यक है। 

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान केन्द्रीय आम बजट में खाद्य सब्सिडी के मद में 2.03 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया था जबकि 2026-27 के वित्त वर्ष के लिए इसकी अतिरिक्त जरूरतों को पूरा करने के लिए कई प्रस्ताव सामने आए हैं। इसका प्रबंध किस तरह किया जाए, यह एक विचारणीय प्रश्न है और इसका उत्तर तलाशने का प्रयास किया जा रहा है। 

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार यह अतिरिक्त बिल लगभग 25,000 करोड़ रुपए का है जबकि अगले वित्त वर्ष के लिए खाद्य सब्सिडी बिल में महज 5000 करोड़ रुपए की बढ़ोत्तरी होने की संभावना है।

इस तरह 20,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त सब्सिडी का प्रबंध करना सरकार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। खुले बाजार बिक्री योजना के तहत यदि चावल एवं गेहूं की बिक्री में शानदार इजाफा होता तो सरकार को कुछ अतिरिक्त आमदनी प्राप्त हो सकती थी।

सरकार इस योजना में खाद्यान्न की बिक्री बढ़ाने का प्रयास कर सकती है। इसी तरह भारत ब्रांड के चावल की खुदरा बिक्री बढ़ाने तथा राज्य सरकारों को केन्द्रीय पूल से चावल का अधिक उठाव करने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए भी कुछ कदम उठाने पर विचार किया जा सकता है।