खाद्य तेलों का आयात बढ़कर 160 लाख टन के करीब पहुंचने का अनुमान

25-Jul-2025 01:10 PM

नई दिल्ली। एक अग्रणी उद्योग संस्था- इंडियन वैजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (आईवीपीए) के अध्यक्ष सुधाकर देसाई ने 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (नवम्बर-अक्टूबर) के दौरान देश में खाद्य तेलों का आयात बढ़कर 160 लाख टन के करीब पहुंच जाने का अनुमान लगाया है

जो 2023-24 सीजन के आयात 159 लाख टन से कुछ अधिक है। वैश्विक बाजार में खाद्य तेलों का दाम कुछ नरम पड़ने तथा आगामी त्यौहारी सीजन में घरेलू मांग मजबूत रहने की संभावना से आयात बढ़ने की उम्मीद है। 

एसोसिएशन के अध्यक्ष के अनुसार चालू मार्केटिंग सीजन के शुरूआती 8 महीनों में खाद्य तेलों का आयात घट गया क्योंकि एक तो इसका वैश्विक बाजार भाव ऊंचा रहा और दूसरे दक्षिण एशिया मुक्त व्यापार क्षेत्र (साफ्टा) संधि के तहत पड़ोसी देशों से भारी मात्रा में शुल्क मुक्त सस्ते खाद्य तेलों का आयत होने की आशंका बनी हुई थी।

घरेलू बाजार की स्थिति को देखते हुए भी आयातकों को विदेशों से विशाल मात्रा में खाद्य तेल मंगाने का प्रोत्साहन नहीं मिला। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) के आंकड़ों से पता चलता है कि नवम्बर 2024 से जून 2025 के आठ महीनों के दौरान भारत में तेलों का आयात घटकर 92 लाख टन रह गया जो 2023-24 के मार्केटिंग सीजन की समान अवधि के आयात 101 लाख टन से 9 प्रतिशत कम रहा। 

सुधाकर देसाई का कहना है कि आगामी महीनों में खाद्य तेल का आयात तेजी से बढ़ सकता है जिससे इस गिरावट की भरपाई हो जाएगी और बहुत संभव है कि पूरे मार्केटिंग सीजन में इसका कुल आयात सुधरकर 160 लाख टन के आसपास पहुंच जाए। निर्यातक देशों में पाम तेल का ऑफर मूल्य कुछ हद तक नरम पड़ा है।

सरकार ने क्रूड एवं रिफाइंड खाद्य तेल पर आयात शुल्क के बीच अंतर बढ़ा दिया है जिससे स्वदेशी रिफाइनर्स को क्रूड खाद्य तेल का आयात बढ़ाने का प्रोत्साहन मिल सकता है।

आईवीपीए के अध्यक्ष के अनुसार इस 160 लाख टन खाद्य तेल के कुल अनुमानित आयात में 90 लाख टन पाम तेल तथा 45 लाख टन सोयाबीन तेल का योगदान रह सकता है जबकि शेष 25 लाख टन की भागीदारी सूरजमुखी तेल की रहने की संभावना है। हाल के महीनों के दौरान पाम तेल का मूल्य कुछ नीचे आया है।