खाद्य तेल, दलहन तथा रूई के कारण कृषि उत्पादों के आयात खर्च में भारी वृद्धि
23-Apr-2025 03:43 PM
नई दिल्ली। केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत में कृषि उत्पादों का आयात पर होने वाला खर्च बढ़कर 27 अरब डॉलर के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया जो वित्त वर्ष 2023-24 (अप्रैल-मार्च) के कुल आयात खर्च 22.13 अरब डॉलर से करीब 20 प्रतिशत ज्यादा रहा।
समीक्षाधीन अवधि के दौरान खाद्य तेलों पर आयात खर्च 14.87 अरब डॉलर से 16.55 प्रतिशत बढ़कर 17.33 अरब डॉलर तथा दलहनों के आयात पर होने वाला खर्च 3.74 अरब डॉलर से 46 प्रतिशत उछलकर 5.47 अरब डॉलर के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया।
इसके अलावा 2023-24 के मुकाबले 2024-25 के वित्त वर्ष में दलहनों का आयात 44 लाख टन से बढ़कर 67 लाख टन पर तथा रूई का आयात खर्च 59 करोड़ डॉलर से लगभग दोगुना उछलकर 1.21 अरब डॉलर पर पहुंच गया। जहां तक फलों- सब्जियों का सवाल है तो इसका आयात खर्च 2.92 अरब डॉलर से 11 प्रतिशत बढ़कर 3.26 अरब डॉलर पर पहुंचा।
खाद्य उत्पादों के संवर्ग में सर्वाधिक खर्च खाद्य तेलों के आयात पर हुआ। उद्योग समीक्षकों के अनुसार यद्यपि इसके आयात की मात्रा में ज्यादा बढ़ोत्तरी नहीं हुई मगर निर्यातक देशों में भाव ऊंचा रहने से आयात खर्च काफी बढ़ गया।
वित्त वर्ष 2024-25 की सम्पूर्ण अवधि के दौरान इंडोनेशिया, मलेशिया एवं थाईलैंड जैसे शीर्ष निर्यातक देशों में पाम तेल का दाम काफी ऊंचे स्तर पर रहा।
जहां तक दलहनों की बात है तो इसकी आयात मात्रा में 50 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोत्तरी हो गई। वित्त वर्ष 2023-24 में करीब 44 लाख टन दलहनों का आयात किया गया था जो 2024-25 में उछलकर 67 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
घरेलू प्रभाग में आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने तुवर, उड़द, मसूर, देसी चना एवं पीली मटर का आयात सीमा शुल्क से मुक्त है जबकि मसूर एवं देसी चना पर 10-10 प्रतिशत का आयात शुल्क लगा हुआ है। रूई के घरेलू उत्पादन में भारी गिरावट आने से विदेशों से इसका आयात बढ़ाने की आवश्यकता महसूस हुई।
