महाराष्ट्र में चीनी के उत्पादन में 29 लाख टन की जोरदार गिरावट
16-May-2025 05:21 PM
पुणे। महाराष्ट्र में गन्ना की क्रशिंग एवं चीनी के उत्पादन का अभियान समाप्त हो गया है। 2024-25 के मार्केटिंग सीजन के दौरान राज्य में 200 चीनी मिलों में गन्ना की क्रशिंग आरंभ हुई थी और 15 मई से पूर्व ही ये तमाम इकाइयां बंद हो गई।
उसके बाद जो आंकड़ा सामने आया उससे पता चलता है कि राज्य में चीनी के कुल उत्पादन में 29 लाख टन की जोरदार गिरावट आ गई। वहां चीनी का सकल उत्पादन 2023-24 सीजन के 110.20 लाख टन से लुढ़ककर 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन में 80.95 लाख टन पर सिमट गया।
महाराष्ट्र में गन्ना की कुल क्रशिंग पिछले सीजन के 1070 लाख टन से घटकर इस बार 850 लाख टन पर अटक गई और गन्ना से चीनी की औसत रिकवरी दर भी 10.27 प्रतिशत से गिरकर 9.50 प्रतिशत रह गई।
गन्ना की आपूर्ति कम होने से इसकी क्रशिंग की अवधि भी काफी छोटी रही। अधिकांश मिलों में क्रशिंग की प्रक्रिया 90 दिनों तक ही जारी रही जबकि विगत वर्षों में वहां 130 से 150 दिनों तक गन्ना की क्रशिंग चलती रहती थी।
महाराष्ट्र पहले देश में चीनी का सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य बना हुआ था लेकिन इस बार उससे आगे निकलकर प्रथम स्थान पर पहुंच गया।
चालू मार्केटिंग सीजन के दौरान महाराष्ट्र में 11 चीनी मिलों जनवरी 2025 में, 95 इकाइयां फरवरी में, 89 मिलें मार्च में, 4 मिलें अप्रैल में तथा तथा 1 मिल मई 2025 में बंद हुई। अंततः 14 मई को राज्य में गन्ना क्रशिंग एवं चीनी के उत्पादन के सीजन की समाप्ति की आधिकारिक घोषणा कर दी गई।
उद्योग समीक्षकों का कहना है की गन्ना क्रशिंग का सीजन छोटा होने तथा चीनी की औसत रिकवरी दर में गिरावट आने का गंभीर वित्तीय प्रभाग पड़ेगा। इस बार गन्ना की क्रशिंग की अवधि अब तक की सबसे छोटी अवधि में से एक रही।
इससे चीनी मिलों की वित्तीय स्थिरता प्रभावित हो सकती है। इसके फलस्वरूप पिछले सीजन के मुकाबले इस बार राज्य की चीनी मिलों को संयुक्त रूप से लगभग 10,700 करोड़ रुपए का नुकसान होने की आशंका है।
इसी तरह चीनी की रिकवरी दर में आई गिरावट से मिलों को 2960 करोड़ रुपए का अतिरिक्त घाटा हो सकता है। राज्य में गन्ना क्रशिंग का अगला सीजन वास्तविक रूप से नवम्बर 2025 से आरंभ होगा।
