महाराष्ट्र में खरीफ फसलों की बिजाई सामान्य लेकिन हालत असामान्य

05-Sep-2025 07:56 PM

पुणे। हालांकि तमाम झंझावातों के बावजूद महाराष्ट्र में खरीफ फसलों का उत्पादन क्षेत्र पिछले साल के काफी करीब पहुंच गया है मगर भारी वर्षा एवं बाढ़ के कारण कई जिलों में फसलों को हानि भी हुई है।

8 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में विभिन्न खरीफ फसलों को नुकसान की आधिकारिक पुष्टि पहले ही हो चुकी है जबकि उसके बाद भी फसल पर खतरा बना रहा। 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र में चालू वर्ष के दौरान 2 सितम्बर तक खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 145.31 लाख हेक्टेयर पर पहुंच सका जो गत वर्ष की सामान अवधि के बिजाई क्षेत्र 146.86 लाख हेक्टेयर से 1.55 लाख हेक्टेयर कम है।

धान एवं मोटे अनाजों के संवर्ग में इस बार केवल मक्का का उत्पादन क्षेत्र 11.20 लाख हेक्टेयर से उछलकर 14.51 लाख हेक्टेयर के शीर्ष स्तर पर पहुंचा है जबकि धान का क्षेत्रफल 15.82 लाख हेक्टेयर से गिरकर 15.08 लाख हेक्टेयर, ज्वार का रकबा 1.05 लाख हेक्टेयर से गिरकर 84 हजार हेक्टेयर और बाजरा का बिजाई क्षेत्र 4.01 लाख हेक्टेयर से घटकर 3.25 लाख हेक्टेयर पर अटक गया।

दलहन फसलों में पहले तुवर की बिजाई पीछे चल रही थी मगर बाद में गत वर्ष के 12.17 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 12.19 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गई। लेकिन मूंग एवं उड़द का रकबा गत वर्ष से पीछे रह गया यही हालत सोयाबीन, मूंगफली एवं कपास की भी रही।

ध्यान देने वाली बात है कि महाराष्ट्र देश में तुवर, सोयाबीन, कपास एवं गन्ना का दूसरा सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य है जबकि वहां मक्का सहित कई अन्य फसलों का उत्पादन भी बड़े पैमाने पर होता है।

गत वर्ष की तुलना में इस बार वहां सोयाबीन का उत्पादन क्षेत्र 51.28 लाख हेक्टेयर से घटकर 49.62 लाख हेक्टेयर, मूंगफली का बिजाई क्षेत्र 1.48 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 1.35 लाख हेक्टेयर, उड़द का क्षेत्रफल 3.87 लाख हेक्टेयर से गिरकर 3.76 लाख हेक्टेयर पर तथा मूंग का रकबा 2.35 लाख हेक्टेयर से घटकर 2.11 लाख हेक्टेयर रह गया।